-मगही भाषा तथा संस्कृति का संरक्षण आवश्यक – मेहता।
जनकपुरधाम/मिश्रीलाल मधुकर।
मगही भाषा,लोक कला, साहित्य, संस्कृति तथा संस्कार को संरक्षण करना आवश्यक है।इसके लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा। उपरोक्त बातें बिधायक राम प्रसाद मेहता ने विराटनगर मेंदो दिवसीय मगही भाषा, संस्कृति तथा संस्कार संबंधी गोष्ठी में प्रमुख अतिथि पद से वोलते हुए उन्होंने कहीं।

उन्होंने कहा कि आज के युवा अपनी मातृभाषा, संस्कृति तथा संस्कार भूलते जा रहे हैं। पाश्चात्य संस्कृति अपना रहे हैं।यह चिंतनीय बिषय हैं।जय प्रकाश महतो की अध्यक्षता में संपन्न दो दिवसीय गोष्ठी में मगही भाषा, संस्कृति तथा संस्कार से संबंधित चार कार्यपत्र प्रस्तुत किए गये। गोष्ठी में बिधायक गीता रानी महतो,वृहत मधेशी समाज के कोषाध्यक्ष योगेन्द्र प्रसाद यादव,डा.महेन्द्र नारायण यादव, मगही भाषा के शव्दकोष रचयिता वीर कुमार महतो,महेन्द्र मौरंग आदर्श बहुमुखी क्याम्पस के प्रिंसिपल सहित मौरंग,झापा,सुनहरी,के बिभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों की सहभागिता थीं।












