-कालाबाजारी से 600-800 रुपए बिक रहा यूरिया
दीपक कुमार तिवारी।मुजफ्फरपुर।
जिले के पूर्वी बॉर्डर क्षेत्र बन्दरा प्रखंड एवं आसपास के इलाकों में यूरिया की किल्लत है। किसान कालाबाजारी के शिकार हैं। किसान जितेंद्र ठाकुर विजय ठाकुर कमलेश ठाकुर(सकरी, चांदपुरा) मनोज झा(बन्दरा) आदि किसानों ने बताया कि यूरिया का दाम भले ही 266 रुपये बोरा है, लेकिन प्रखंड क्षेत्र में 600 से 800रुपया प्रति बोरा के हिसाब से यूरिया खाद कालाबाजारी के रूप में बेचा जा रहा है। विरोध जताने वाले किसानों को यूरिया नहीं मिल रही है।ज़बकी कालाबाजारी से खरीदने वाले खरीदारों को जरूरत के हिसाब से यूरिया मिल रहे। वहीं वाजिब दाम पर सरकारी खाद खोजने वाले किसान भटक रहे हैं।किसानों के शिकायत पर अधिकारियों के द्वारा किसानों से लिखित शिकायत करने की मांग की जाती है, जबकि किसी भी मामले में अधिकारियों के द्वारा कार्यवाई नहीं हो पा रही है।

मामले में बंदरा पूर्वी के जिला पार्षद फ़नीष कुमार चुन्नू ने बताया कि जिले के थोक विक्रेताओं के द्वारा बन्दरा प्रखंड एवं आसपास के क्षेत्रों में खादों की कालाबाजारी करवाई जा रही है और इस आर में एक बहुत बड़ा कारोबार किया जा रहा है।जिसपर जिला स्तर से रोक लगाना और कार्यवाई करना ही सम्भव है।उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों से प्रत्येक सीजन में इस तरह का कालाबाजारी किया जाता है। जिला पार्षद ने दावा किया क्षेत्र में कृषि विभाग के अधिकारी दिखते हीं नहीं हैं।न कहीं खाद दुकानों का निगरानी या जांच करते नजर आते हैं।न कहीं कोऑर्डिनेटर जांच या कार्यवाई में दिखते हैं। वही ईमानदार दुकानदारों को खादों का आवंटन नहीं होता है, जबकि क्षेत्र में कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों को आवंटन भी अतिरिक्त करा दिया जाता है और बदले में कालाबाजारी का खुलेआम खेल खेला जाता है।

ऐसे में क्षेत्र के किसान दोहन के शिकार हो रहे हैं। जिला पार्षद का आरोप है कि पिछले महीने प्रखण्ड स्तरीय किसान संगोष्ठी कार्यक्रम में उन्होंने विधायक एवं अधिकारियों के समक्ष कालाबाजारी का मामला जोरशोर से उठाया भी था, तब आश्वासन देकर मामले को टाल दिया गया।अबतक कार्रवाई नहीं हो सकी।जबतक ऐसे मुनाफाखोर दुकानदारों पर एफआईआर और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई नहीं होगी तब तक धंधा पर लगाम लगाना सम्भव नहीं है।
















