-सहदेई के चकेयाज में राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र में सफलतापूर्वक तैयार हुआ सहभागी किस्म के धान का बीज
संवाददाता।देसरी।
वैशाली जिला के सहदेई बुजुर्ग प्रखंड क्षेत्र के चकफैज पंचायत के चकेयाज स्थित राज्य सरकार के राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र में इस बार दो हेक्टेयर में 50 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक उत्पादन हुआ है। शुरुआती दौर में अगर मौसम का साथ मिलता तो और अधिक उत्पादन धान का उत्पादन होता है। लेकिन बीचरा तैयार होने से लेकर रोणनी तक मौसम की बेरुखी की वजह से उत्पादन कम हो सकी। राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र में रवि और खरीफ फसलों में धान एवं गेहूं का बीज तैयार हो रहा। यहां उत्पादन किया गया धान और गेहूं का बीज राज्य सरकार के कृषि विभाग के द्वारा राज्य भर के किसानों को अनुदानित दर पर उपलब्ध कराती है।

राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र 9.16 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जबकि कृषि विभाग के दखल कब्जा में मात्र दो हेक्टेयर होने की वजह से दो हेक्टेयर में ही बीज का उत्पादन हो रहा है। बचे 7.16 भूमि अतिक्रमण का शिकार है। उधर राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र में इस बार 60 किलो सहभागी किस्म की 12 जून को धान का वीचरा और 4 जुलाई को रोपनी की गई थी। धान का बीज हजारीबाग झारखंड से उपलब्ध कराई गई थी। 110 दिनों में समसेबल के सहारे बीज का उत्पादन होने के बाद मशीन के द्वार काटी गई। बताया गया कि उत्पादन सभी दान के बीज को भंडारण किया गया है। सभी बीज को 25 किलो का पैकेट तैयार कर बीज निगम हाजीपुर में भेजा जाएगा। उसके बाद हरियाणा के चित्रकोट समेत अन्य राज्यों में भेजी जाती है। जो प्रखंडों में भेजकर किसानों के बीच अनुदित दर पर वितरण किया जाता है।
सहभागी धान का यह है खासियत
मनोज कुमार सिंह प्रक्षेत्र सहायक ने बताया कि सहभागी धान 90 से 120 दिन में तैयार हो जाता है। जबकि उत्पादन 35 से 40 क्विन्टल प्रति हेक्टेयर औसत उपज होती है। खेती के लिए 30 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। इसका दाना लम्बा एवं पतला पुलाव, बिरयानी व चूड़ा के लिए उपयुक्त है। सहभागी किस्म के धान कम बारिश में अच्छी उपज देती है। इस धान की सबसे बड़ी बात है कि अगर बीज डालने या रोपनी के समय 15 दिनों तक बारिश नहीं होती है, तो फसल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह धान झारखंड और उड़ीसा में खेती के लिए चयन किया गया था, जहां सुखार के स्थिति में अच्छा उत्पादन हुआ। उसके बाद राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र सहदेई के चकेयाज में लगाया गया है, जिसका उत्पादन सफलतापूर्वक हुआ है। यह धान सुखार के लिए उपयुक्त मानी गई है। किसान अपने खेतों में लगातार कम पानी में अच्छी उत्पादन कर सकते है।













