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सम्राट सरकार के पहले महीने की तस्वीर: सख्त फैसले, विकास का विजन और सुशासन का संदेश

-सम्राट सरकार के पहले महीने की तस्वीर: सख्त फैसले, विकास का विजन और सुशासन का संदेश

दीपक कुमार तिवारी, पटना।

बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद अब नई सरकार अपने फैसलों और कार्यशैली से अलग पहचान बनाने में जुटी हुई है। 15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले सम्राट चौधरी ने महज एक महीने के भीतर कई ऐसे बड़े और निर्णायक फैसले लिए हैं, जिनका सीधा संबंध विकास, सुशासन, पारदर्शिता और कानून-व्यवस्था से जुड़ा है। जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार की “न्याय के साथ विकास” की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए सम्राट चौधरी अब “समृद्ध बिहार” के विजन को जमीन पर उतारने की कोशिश में दिखाई दे रहे हैं।

एनडीए सरकार की शुरुआती चार कैबिनेट बैठकों में लिए गए फैसलों ने साफ संकेत दिया है कि सरकार प्रशासनिक सख्ती, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और बुनियादी विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के मूड में है। मुख्यमंत्री लगातार खुद को तेज निर्णय लेने वाले और सख्त प्रशासक के रूप में स्थापित करने में जुटे हैं। यही वजह है कि एक ओर अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दिखाई दे रही है, तो दूसरी ओर शिक्षा, महिला सुरक्षा और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में बड़े फैसले लिए गए हैं।

10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप का बड़ा विजन:

सम्राट सरकार के सबसे महत्वाकांक्षी फैसलों में बिहार के 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना प्रमुख मानी जा रही है। यह मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इन टाउनशिप को पूरी तरह प्लांड तरीके से विकसित किया जाएगा, जहां चौड़ी सड़कें, हरित क्षेत्र, पार्क, बाजार और आधुनिक आवासीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

सरकार का मानना है कि इससे बड़े शहरों पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकेगा और लोगों को बेहतर शहरी सुविधाएं मिलेंगी। सासाराम को भी इस परियोजना में शामिल करने का प्रस्ताव चर्चा में है। खास बात यह है कि इन टाउनशिप के नाम बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखकर तय किए जाएंगे।

अपराध और भ्रष्टाचार पर सख्ती से नई छवि:

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी लगातार कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। हिनीयस क्राइम के मामलों में पुलिस को जीरो टॉलरेंस अपनाने का निर्देश दिया गया है। हाल के दिनों में बढ़ी एनकाउंटर की घटनाओं और “ऑपरेशन लंगड़ा” जैसी कार्रवाइयों ने सरकार की सख्त कार्यशैली को चर्चा में ला दिया है।

इसी क्रम में कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों का तबादला भी किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय में हुए बदलावों को प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करने और नई कार्यशैली लागू करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

“पुलिस दीदी योजना” से छात्राओं को सुरक्षा कवच:

महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सरकार ने “पुलिस दीदी योजना” की शुरुआत की है। इस योजना के तहत स्कूलों और कॉलेजों के आसपास महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसके लिए 1500 स्कूटी खरीदने का निर्णय लिया गया है, ताकि महिला पुलिसकर्मी तेजी से गश्त कर सकें।

सरकार का उद्देश्य छेड़खानी, रोड साइड रोमियो और महिलाओं के खिलाफ अपराध पर लगाम लगाना है। राजनीतिक हलकों में इसे महिला सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार का बड़ा संदेश माना जा रहा है।

“सहयोगी त्रिवेणी” से जवाबदेही तय करने की तैयारी:

सुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने के लिए सरकार ने “सहयोगी त्रिवेणी” की शुरुआत का ऐलान किया है। इसके तहत सहयोग हेल्पलाइन 1100, सहयोग पोर्टल और पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाए जाएंगे।

हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को लगने वाले इन शिविरों में ब्लॉक, थाना और अंचल स्तर की शिकायतों की सुनवाई होगी। सबसे अहम बात यह है कि शिकायतों के निपटारे के लिए 30 दिन की समय सीमा तय की गई है। तय समय में समाधान नहीं होने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है।

शिक्षा व्यवस्था में बड़ा निवेश:

सम्राट सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े फैसले लिए हैं। राज्य के सभी जिला स्कूलों और प्रत्येक प्रखंड के एक चयनित उच्च माध्यमिक विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने के लिए 800 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

इसके अलावा जिन 208 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहां नए कॉलेज खोलने का फैसला लिया गया है। इसके लिए 104 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत 9152 नए पदों का सृजन होगा। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में उच्च शिक्षा की पहुंच मजबूत होगी।

निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती:

सरकार ने निजी स्कूलों की फीस और अन्य शुल्कों की मनमानी पर भी सख्त रुख अपनाया है। अब निजी विद्यालयों को अपना फीस स्ट्रक्चर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। साथ ही अभिभावकों को किताबें और यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदने की स्वतंत्रता दी गई है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फीस बकाया होने पर भी छात्रों को परीक्षा और रिजल्ट से वंचित नहीं किया जाएगा। इस फैसले को मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

बिहार के ठेकेदारों को प्राथमिकता:

राज्य सरकार ने बिहार लोक निर्माण संहिता में संशोधन करते हुए 50 करोड़ रुपये तक के सरकारी सिविल कार्यों में राज्य के ठेकेदारों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। सरकार का तर्क है कि इससे स्थानीय संवेदकों को काम मिलेगा, रोजगार बढ़ेगा और बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

ई-निबंधन सिस्टम से पारदर्शिता:

जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बनाने के लिए सरकार ने ई-निबंधन सिस्टम लागू किया है। इसका उद्देश्य भ्रष्टाचार कम करना और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है।

इसके साथ ही 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए घर बैठे रजिस्ट्री सुविधा शुरू करने का फैसला भी लिया गया है। इसे जनसरोकार से जुड़ा संवेदनशील कदम माना जा रहा है।

सनातन संस्कृति और धार्मिक पर्यटन पर फोकस:

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का मंदिरों और धार्मिक स्थलों से जुड़ाव भी राजनीतिक और सांस्कृतिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। महावीर मंदिर और पटन देवी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर उनकी सक्रिय मौजूदगी को सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण से जोड़कर देखा जा रहा है।

सरकार बोधगया और विष्णुपाद कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के जरिए धार्मिक पर्यटन को नई गति देने की तैयारी में है।

पहले महीने में ही सख्त और सक्रिय सरकार की छवि:

एक महीने के भीतर लिए गए फैसलों से यह स्पष्ट हो रहा है कि सम्राट चौधरी खुद को सिर्फ राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि निर्णायक प्रशासक के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। विकास, महिला सुरक्षा, शिक्षा, प्रशासनिक पारदर्शिता और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार ने तेजी दिखाने की कोशिश की है।

हालांकि विपक्ष इन फैसलों को लेकर सवाल भी उठा रहा है और इन योजनाओं के जमीनी असर पर सबकी निगाहें टिकी हैं। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि बिहार की राजनीति में सम्राट सरकार ने अपने पहले महीने में ही विकास और सख्ती की नई पटकथा लिखने की कोशिश शुरू कर दी है।