-सम्राट सरकार का फोकस साफ, विकास मिशन के लिए भरोसेमंद मंत्रियों पर बड़ा दांव
पटना। दीपक कुमार तिवारी।
बिहार में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में तेज़ी से काम शुरू कर दिया है। कैबिनेट विस्तार, विभागों का बंटवारा और सरकार के पहले 30 दिनों के फैसलों को देखें तो यह साफ संकेत मिल रहा है कि नई सरकार विकास, निवेश, शहरीकरण और बुनियादी ढांचे को सबसे बड़ी प्राथमिकता दे रही है।
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उन मंत्रियों को लेकर हो रही है, जिन पर मुख्यमंत्री ने अपने बड़े विजन को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें विशेष रूप से नीतीश मिश्रा, श्रेयसी सिंह और ई. शैलेन्द्र के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। तीनों भाजपा कोटे से मंत्री हैं और इन्हें सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विभागों तथा जिलों की जिम्मेदारी दी गई है।
निवेश और औद्योगिकीकरण पर सरकार का सबसे बड़ा फोकस:
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कई बार सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट कर चुके हैं कि बिहार में बड़े पैमाने पर निवेश लाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। सरकार का लक्ष्य राज्य में कम से कम पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना है। इसके साथ ही नए टाउनशिप विकसित करने और हवाई सेवाओं का विस्तार करने की योजना भी सरकार के एजेंडे में शामिल है।
इसी रणनीति के तहत उद्योग विभाग की जिम्मेदारी श्रेयसी सिंह को सौंपी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार बिहार में औद्योगिकीकरण को नई दिशा देना चाहती है और इसी कारण नए चेहरे पर बड़ा भरोसा जताया गया है।
शहरी विकास और टाउनशिप मॉडल की कमान नीतीश मिश्रा को:
सरकार बिहार में योजनाबद्ध शहरी विकास को नई गति देना चाहती है। इसके लिए नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी नीतीश मिश्रा को दी गई है। बिहार के 11 शहरों में सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल है।
इसी के तहत भागलपुर जैसे महत्वपूर्ण जिले का प्रभारी मंत्री भी नीतीश मिश्रा को बनाया गया है। वर्तमान में भागलपुर जिले में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
भागलपुर में 21 हजार करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट:
भागलपुर के पीरपैंती में अडानी ग्रुप द्वारा 2400 मेगावाट का अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने की तैयारी चल रही है। इस परियोजना की लागत 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इसके साथ रेल-सड़क कॉरिडोर निर्माण को भी मंजूरी मिल चुकी है।
इसके अलावा भागलपुर और मुंगेर के बीच गंगा किनारे लगभग 100 किलोमीटर लंबे मरीन ड्राइव के निर्माण का प्रस्ताव भी चर्चा में है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 8500 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

भागलपुर को “ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप” के रूप में विकसित करने की योजना पर भी सरकार काम कर रही है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर के अंदरूनी हिस्सों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की तैयारी है।
सीतामढ़ी को धार्मिक और आर्थिक हब बनाने की तैयारी:
उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह को सीतामढ़ी जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। सीतामढ़ी को धार्मिक, सांस्कृतिक और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से सरकार बेहद महत्वपूर्ण मान रही है।
माता सीता की जन्मस्थली पुनौराधाम को “सीतापुरम” के रूप में विकसित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। यहां भव्य जानकी मंदिर, परिक्रमा पथ, सीता वाटिका और मंडप निर्माण की योजना है।
सीतामढ़ी को राम-जानकी पथ, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे और रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की तैयारी भी चल रही है। साथ ही लगभग 750 एकड़ में आधुनिक सुविधाओं वाली सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई गई है।
दरभंगा और मिथिला क्षेत्र पर विशेष फोकस:
पथ निर्माण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे ई. शैलेन्द्र को दरभंगा जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। सरकार मिथिला क्षेत्र में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य और शहरी विकास को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
दरभंगा में एम्स निर्माण और “मिथिला ग्रीन सिटी” परियोजना को सरकार की बड़ी योजनाओं में शामिल माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री ने अपने भरोसेमंद मंत्रियों को उन्हीं जिलों की जिम्मेदारी दी है, जहां सरकार की सबसे बड़ी विकास योजनाएं प्रस्तावित हैं।
सरकार की रणनीति पर सियासी नजर:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि विकास आधारित नई राजनीतिक पहचान गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्रियों और प्रभारी जिलों के चयन से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, धार्मिक पर्यटन और शहरी विकास के जरिए बिहार की नई तस्वीर पेश करना चाहती है।
हालांकि विपक्ष इन योजनाओं को लेकर सवाल भी उठा रहा है, लेकिन फिलहाल सरकार अपने शुरुआती फैसलों से विकास और तेज प्रशासनिक कार्यशैली का संदेश देने में जुटी हुई है।












