-समावेशी लोकतंत्र की विचारधारा को किया गया आत्मसात
-राजनीति विज्ञान विभाग, दरभंगा में सोल्लासपूर्वक आयोजन
दरभंगा। संवाददाता
स्थानीय विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में शुक्रवार को बाबू जगजीवन राम की जयंती गरिमापूर्ण और सृजनात्मक वातावरण में मनाई गई। विभाग के कौटिल्य कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र में समावेशिता और सामाजिक न्याय की भावना को पुनः जाग्रत करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने की। उन्होंने कहा कि “बाबू जगजीवन राम केवल दलित वर्ग के नेता नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के समावेशी मूल्यों के जीवंत प्रतीक थे। उनकी विचारधारा आज की युवा पीढ़ी को प्रेरणा देने वाली है।” उन्होंने मंच संचालन करते हुए छात्रों को बाबूजी के योगदान से परिचित कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. शाहिद हसन के दीप प्रज्वलन और अध्यक्षीय संबोधन से हुआ। प्रो. मुरारी शरण वर्मा (सेवानिवृत्त शिक्षक) ने बीज भाषण प्रस्तुत किया।
मुख्य वक्ता के रूप में हैमिल्टन (कनाडा) से पधारे प्रख्यात विद्वान प्रो. विनय शंकर प्रसाद ने “लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और बाबू जगजीवन राम का योगदान” विषय पर शोधपरक व्याख्यान देते हुए कहा, “लोकतंत्र की आत्मा उसमें भागीदारी करने वाले सभी वर्गों के समुचित प्रतिनिधित्व में निहित होती है। बाबू जगजीवन राम ने इस प्रतिनिधित्व को सशक्त कर सामाजिक विमर्श को नई दिशा दी।”

डॉ. मनोज कुमार (सहायक प्राध्यापक व उप परीक्षा नियंत्रक) ने कहा कि बाबूजी का सम्पूर्ण जीवन “सामाजिक न्याय, समानता और संघर्ष का जीवंत दस्तावेज है।”
रघुवीर कुमार रंजन (सहायक प्राध्यापक) ने कहा कि बाबूजी ने “लोकतंत्र के भीतर से ही परिवर्तन की राह बनाई और वंचित वर्गों को मुखर स्वर दिया।”
कार्यक्रम में डॉ. मुकुल बिहारी वर्मा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और नीतू कुमारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर पूर्व में आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। रंजना कुमारी को प्रथम, साहिल कुमार को द्वितीय तथा अनीश कुमार और ईशा शाह को संयुक्त तृतीय पुरस्कार मिला।
कार्यक्रम में डॉ. देवनारायण राय, डॉ. सत्यनारायण पासवान, सिद्धार्थ कुमार, केशव चौधरी, रामनाथ शर्मा, अमिनेश कुमार, देवेंद्र, डिंपी कुमारी, साहिल कुमार समेत अनेक छात्र-छात्राएं और शिक्षकगण उपस्थित थे।











