-सदर अस्पताल की इमरजेंसी होगी हाईटेक, रात में भी मिलेंगे विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं
मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। सदर अस्पताल की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह सुदृढ़ और हाईटेक बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत अब देर रात भी इमरजेंसी वार्ड में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी, जिससे गंभीर मरीजों को तत्काल बेहतर इलाज मिल सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग की नई व्यवस्था के अनुसार सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, शिशु रोग तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी। इससे सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक, गंभीर प्रसव और बच्चों की आपात स्थिति जैसे मामलों में मरीजों को शुरुआती और समय पर विशेषज्ञ उपचार मिल सकेगा।
दरअसल, राज्य सरकार आगामी 15 अगस्त से पूरे बिहार में रेफरल पॉलिसी समाप्त करने जा रही है। इसके मद्देनज़र जिला अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है, ताकि मरीजों को छोटी-बड़ी जटिल बीमारियों के लिए मेडिकल कॉलेजों का रुख न करना पड़े।

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में सामने आया था कि रात के समय विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण मुजफ्फरपुर ही नहीं, बल्कि शिवहर, सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण से आने वाले बड़ी संख्या में मरीजों को एसकेएमसीएच रेफर करना पड़ता था। इससे मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का दबाव बढ़ने के साथ कई गंभीर मरीजों की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों में काफी कमी आने की उम्मीद है।
सिर्फ डॉक्टरों की तैनाती ही नहीं, बल्कि सदर अस्पताल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और तकनीकी कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। इमरजेंसी वार्ड में जीवनरक्षक उपकरण, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और 24 घंटे जांच की सुविधा को भी और बेहतर बनाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिला अस्पतालों में रात के समय दी जाने वाली आपातकालीन सेवाओं की मुख्यालय स्तर से नियमित निगरानी की जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा, मेडिकल कॉलेजों पर अनावश्यक दबाव कम होगा और जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार आएगा।












