-संविधान की प्रस्तावना में पृथ्वी और पर्यावरण को स्थान देने की माँग पर दरभंगा से उठा ऐतिहासिक जन-संकल्प
-पन्द्रह अगस्त तक भारत सरकार को भेजा जाएगा डब्ल्यूएनडी प्रस्तावना विस्तार प्रस्ताव – 2025
दरभंगा (लहेरियासराय)।
वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी (WND) के तत्वावधान में दरभंगा में आयोजित एक दिवसीय धरना कार्यक्रम ऐतिहासिक जन-संकल्प का प्रतीक बन गया। धरने का मुख्य उद्देश्य भारतीय संविधान की प्रस्तावना में पृथ्वी और पर्यावरण को स्वतंत्रता, समता, न्याय जैसे मूल मूल्यों के समान दर्जा दिलाने की माँग को राष्ट्रीय विमर्श का विषय बनाना था।
धरने में शिक्षाविदों, युवाओं, किसानों, पर्यावरणविदों और संविधान विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और इस प्रस्ताव के सूत्रधार डॉ. जावैद अब्दुल्लाह ने कहा कि जब तक संविधान की प्रस्तावना जड़ सत्ता – पृथ्वी, प्रकृति और पर्यावरण – से रिक्त है, तब तक वह अधूरी है। उन्होंने कहा कि यह धरना महज़ कार्यक्रम नहीं, बल्कि वैश्विक नैतिक चेतना की नई शुरुआत है।
तीन प्रमुख घोषणाएँ की गईं:
1. केंद्र सरकार से संविधान की प्रस्तावना में पृथ्वी और पर्यावरण को शामिल करने की औपचारिक माँग।
2. नवंबर 2025 में ब्राज़ील के COP-30 सम्मेलन में इस प्रस्ताव को वैश्विक मंच पर रखने की योजना।
3. यदि तीन माह में सकारात्मक पहल नहीं हुई तो 2 अक्टूबर से राष्ट्रीय एवं वैश्विक सत्याग्रह की शुरुआत।

डॉ. अब्दुल्लाह ने महात्मा गांधी और डॉ. आंबेडकर की विचारधारा के आलोक में प्रस्तावना विस्तार को समय की माँग बताया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी और पर्यावरण का संरक्षण एक नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी बननी चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विचारकों – रस्किन, थोरो, रेचल कार्सन आदि के उद्धरणों के माध्यम से पर्यावरणीय न्याय की आवश्यकता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में डॉ. विजय सक्सेना (मानवाधिकार परिषद), मनीष कुमार त्रिगुणायत (महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय), अजीत कुमार मिश्र (भारत-नेपाल कमला मैत्री मंच), नारायण चौधरी (तालाब बचाओ अभियान), मालती देवी (अल्पसंख्यक बोर्ड), हितेश झा, दिनेश साफी, दिलीप मंडल सहित कई प्रबुद्धजनों ने अपने विचार रखे।
राजनीतिक समर्थन भी मिला:
इस धरना को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कई राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त हुआ।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से उदय शंकर मिश्र व प्रिंस परवेज़, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से नारायणजी झा, राजद से डॉ. अमरजी कुमार, भाकपा माले से प्रो. कल्याण भारती व शिवन यादव तथा वसुधैव कुटुंबकम पार्टी से डॉ. अमरनाथ झा ने इस पहल का समर्थन करते हुए इसे युगांतकारी कदम बताया।
कार्यक्रम में मिथिला की सांस्कृतिक चेतना और पृथ्वी के संरक्षण की परंपरा को केंद्र में रखकर यह आह्वान किया गया कि “जहाँ पृथ्वी उपेक्षित है, वहाँ प्रस्तावना अधूरी है।” यह धरना भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक संवैधानिक विमर्श की दिशा बदलने की ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।












