-लोप नूर में गुप्त परमाणु परीक्षण के दावे से बढ़ी चिंता, चीन पर अमेरिकी आरोप
बीजिंग/वॉशिंगटन। वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच चीन के परमाणु परीक्षण कार्यक्रम को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी रणनीतिक और खुफिया हलकों से जुड़े कुछ विश्लेषणों में दावा किया गया है कि चीन शिनजियांग स्थित लोप नूर परमाणु परीक्षण क्षेत्र में भूमिगत गतिविधियों का विस्तार कर रहा है और भविष्य में अत्यधिक कम संकेत देने वाले परीक्षणों की क्षमता विकसित कर सकता है। हालांकि, चीन द्वारा गुप्त रूप से परमाणु विस्फोट किए जाने की कोई सार्वजनिक रूप से पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
इन दावों में ‘डीकपलिंग’ तकनीक का भी उल्लेख किया गया है। विशेषज्ञ चर्चाओं के अनुसार, भूमिगत बड़े खाली स्थान या गुफा में विस्फोट करने से भूकंपीय संकेतों की तीव्रता कम हो सकती है। इसी कारण ऐसी गतिविधियों की पहचान सामान्य भूमिगत परीक्षणों की तुलना में अधिक कठिन हो सकती है। हालांकि, किसी विशेष घटना को परमाणु परीक्षण साबित करने के लिए अतिरिक्त स्वतंत्र प्रमाण जरूरी होते हैं।

लोप नूर लंबे समय से चीन के परमाणु परीक्षण कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र रहा है। अमेरिकी थिंक-टैंक से जुड़े विश्लेषणों में इस क्षेत्र में सुरंगों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे के विस्तार का उल्लेख किया गया है। इन गतिविधियों को लेकर अलग-अलग विशेषज्ञों की अलग-अलग व्याख्याएं हैं।
चीन ने अतीत में ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका के पास गुप्त परमाणु परीक्षणों के दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण नहीं हैं।
इस बीच परमाणु हथियारों की वैश्विक तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। SIPRI के 2026 आकलन के मुताबिक जनवरी 2026 में दुनिया में अनुमानित 12,187 परमाणु हथियार थे। इनमें से करीब 9,745 सैन्य भंडार में संभावित उपयोग के लिए थे। रूस और अमेरिका के पास मिलाकर दुनिया के लगभग 83 प्रतिशत उपयोग योग्य परमाणु हथियार हैं। SIPRI के अनुसार चीन समेत सभी नौ परमाणु-सशस्त्र देश अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण पर काम कर रहे हैं।
ऐसे में लोप नूर से जुड़ी गतिविधियों ने परमाणु पारदर्शिता, हथियार नियंत्रण और भविष्य की हथियार होड़ को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। हालांकि, चीन द्वारा हाल में गुप्त परमाणु विस्फोट किए जाने का निष्कर्ष निकालने के लिए सार्वजनिक प्रमाण फिलहाल अपर्याप्त हैं।












