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योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा और शरीर के बीच संतुलन की प्रक्रिया है : देवराज त्रिपाठी

-योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा और शरीर के बीच संतुलन की प्रक्रिया है : देवराज त्रिपाठी

मोतिहारी / राजन द्विवेदी।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर व्यवहार न्यायालय मोतिहारी स्थित स्थायी लोक अदालत सभागार में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवराज त्रिपाठी की अध्यक्षता में एक योग सत्र का आयोजन किया गया। योग शिविर को संबोधित करते हुए वे कहे कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा और शरीर के संतुलन की प्रक्रिया है। न्यायिक कार्य में व्यस्त रहने वाले हम सभी के लिए योग मानसिक एकाग्रता और तनाव प्रबंधन का सशक्त माध्यम है। वहीं कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश संदीप सिंह ने न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मियों को योग के महत्व, लाभ और जीवन में इसके आवश्यक योगदान के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी । वहीं योग प्रशिक्षकों द्वारा श्वास-प्रश्वास तकनीक, आसनों और ध्यान क्रियाओं का अभ्यास ताड़ासन, भुजंगासन, वज्रासन, अनुलोम-विलोम और ध्यान तकनीकों के माध्यम से न्यायाधीश, न्यायिक पदाधिकारी व न्यायिक कर्मियों को कराया।

शिविर में प्रधान जिला जज देवराज त्रिपाठी, कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश संदीप सिंह , विशेष न्यायाधीश मुकुंद कुमार, ब्रजेश कुमार,
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र प्रसाद, अरुण कुमार सिन्हा , मिथिलेश झा, राघवेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पुनीत कुमार तिवारी , अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रसेनजीत सिंह, गौरव सिंह आदि थे। कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सह सब जज 6 श्वेता सिंह ने की।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नियमित योग को जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।