-मुजफ्फरपुर की जुड़वा बहनों ने CSIR-UGC NET में रचा इतिहास, छोटी बहन ने हासिल की ऑल इंडिया 92वीं रैंक
मुजफ्फरपुर। एक साथ जन्मीं, साथ पली-बढ़ीं, साथ पढ़ीं और अब सफलता भी साथ हासिल की। मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड स्थित खरहर गांव की जुड़वा बहनों शोनाया निशांत और शनाया निशांत ने CSIR-UGC NET परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। दोनों ने जंतु विज्ञान विषय से परीक्षा दी थी। शनाया ने ऑल इंडिया 92वीं रैंक हासिल कर जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए क्वालीफाई किया है, जबकि शोनाया ने भी NET परीक्षा उत्तीर्ण की है।
26 वर्षीय दोनों बहनों की सफलता की कहानी का सबसे खास पहलू यह है कि उनके जन्म में महज 20 मिनट का अंतर है। शोनाया अपनी छोटी बहन शनाया से 20 मिनट बड़ी हैं। मैट्रिक से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक की परीक्षाओं में शोनाया मामूली अंकों के अंतर से अपनी छोटी बहन से आगे रहती थीं। CSIR-NET के परिणाम में पहली बार शनाया ने अपनी बड़ी बहन को पीछे छोड़ते हुए ऑल इंडिया 92वीं रैंक हासिल की।
दोनों बहनों ने दसवीं तक की पढ़ाई छपरा हाई स्कूल से की। इसके बाद इंटरमीडिएट, स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई लंगट सिंह कॉलेज, मुजफ्फरपुर से पूरी की। दोनों ने जंतु विज्ञान विषय में पीजी किया और प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुईं। पढ़ाई के दौरान लगभग हर परीक्षा में शोनाया कुछ अंकों से आगे रहती थीं। हालांकि, CSIR-NET में शनाया ने 92वीं रैंक हासिल कर JRF प्राप्त किया, जबकि शोनाया ने NET क्वालीफाई किया।

दोनों बहनों के पिता कौशलेंद्र झा ने बताया कि शनाया को खुद से अधिक अंक मिलने की सबसे ज्यादा खुशी शोनाया को ही है। शोनाया को भरोसा है कि अगली परीक्षा में वह NET-JRF भी हासिल करेंगी। उन्होंने इसके लिए अगली परीक्षा का फॉर्म भी भर दिया है। शोनाया असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी के लिए भी क्वालीफाई कर चुकी हैं।
खास बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर की इस कठिन परीक्षा की तैयारी के लिए दोनों बहनों ने किसी बड़े शहर में जाकर कोचिंग नहीं की। गांव में रहकर ही सेल्फ स्टडी के जरिए तैयारी की। दोनों रोजाना करीब आठ से दस घंटे पढ़ाई करती थीं। ऑनलाइन कक्षाओं और डिजिटल स्टडी मटेरियल के माध्यम से उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत किया। तैयारी में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भी मदद ली।
एक ही विषय होने के कारण दोनों बहनें एक-दूसरे की स्वाभाविक सहपाठी बनी रहीं। किसी टॉपिक को समझने में परेशानी होती तो दोनों आपस में चर्चा करतीं और किसी सवाल पर अटकने पर मिलकर उसका समाधान तलाशतीं। एक की किसी विषय पर पकड़ बेहतर होती तो वह दूसरी को समझाती। इस तरह पढ़ाई के दौरान दोनों एक-दूसरे की साथी के साथ-साथ कई बार शिक्षक की भूमिका में भी रहीं।
शोनाया और शनाया के बीच पढ़ाई को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा जरूर थी, लेकिन एक-दूसरे को पीछे छोड़ना उनका लक्ष्य कभी नहीं रहा। दोनों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी भी कठिन विषय या सवाल को मिलकर समझना और अपनी तैयारी को बेहतर करना था। यही आपसी सहयोग उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना। CSIR-NET के परिणाम में दोनों के बीच उपलब्धि का अंतर जरूर रहा, लेकिन परिवार इस सफलता को दोनों बहनों की साझा उपलब्धि के रूप में देख रहा है।












