-मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने पर जोर
मोतिहारी। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के काउंसलिंग सेल एवं प्रॉक्टोरियल बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को “मेन्टल हेल्थ स्टिग्मा: साइकोलॉजी काँसेकुएन्सेस एंड इट्स सोशल ओरिजिन्स” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के महात्मा बुद्ध परिसर स्थित बृहस्पति सभागार में हुआ।
संगोष्ठी में मानसिक स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक लक्षणों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक के व्यक्तिगत एवं सामाजिक प्रभावों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर समाज में मौजूद पूर्वाग्रह और भेदभाव प्रभावित व्यक्ति की परेशानी को और बढ़ा सकते हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और समय पर सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।
कार्यक्रम में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञ प्रो. तुषार सिंह, केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के डॉ. रवि पांडेय, प्रो. सुजीत चौधरी और प्रो. पंकज सिंह समेत कई विशेषज्ञ एवं वक्ता शामिल हुए। विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. ए.के. सरण, ओएसडी प्रशासन, डॉ. शशि प्रभा, छात्र परामर्शदाता एवं संयोजक, प्रो. सरोज रंजन, प्रो. बिमलेश कुमार, प्रो. पंकज कुमार सिंह, डॉ. अनुपम कुमार वर्मा, डॉ. श्याम बाबू प्रसाद, डॉ. अवनीश कुमार तथा डॉ. उमेश कुमार सहित अन्य शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों को समझने, समय रहते सहायता लेने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर व्याप्त चुप्पी और सामाजिक कलंक को समाप्त करने में परिवार, शैक्षणिक संस्थानों और समाज की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है।
संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के साथ संवाद किया तथा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय समुदाय के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मनोवैज्ञानिक समस्याओं से जुड़े मिथकों और सामाजिक कलंक को कम करना तथा जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के लिए सकारात्मक एवं संवेदनशील वातावरण तैयार करना रहा।












