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-भोज-भानस में इस्तेमाल होता था कमला का पानी
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-डब्ल्यूएनडी द्वारा नदी सत्याग्रह का चौथा चरण धोई घाट में शुरू किया गया
सम्वाददाता।दरभंगा।
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वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी (डब्ल्यूएनडी) दरभंगा द्वारा चल रह हे “नदी सत्याग्रह” अभियान (चतुर्थ चरण) के अन्तर्गत “नव वर्ष–नदी विमर्श” का आयोजन धोई घाट चौक स्थित राधे कृष्णा मन्दिर के प्रांगन में आयोजित किया गया। लेखक एवं पृथ्वी अधिकार कार्यकर्ता डॉ. जावैद अब्दुल्लाह ने बताया कि “नव वर्ष – नदी विमर्श” बैठक का उद्देश्य कमला की सभी धारों को पुनर्जीवित करने हेतु चलाये जा रहे नदी सत्याग्रह के इस अभियान में स्थानीय लोगों को जोड़ना तथा दोनों किनारों पर बसे कमला वासियों से संवाद स्थापित करना है; साथ ही इसमें युवाओं की भागीदारी बढ़े; यह भी इस बैठक का उद्देश्य है। डॉ. जावैद ने आगे कहा कि संविधान की प्रस्तावना एवं राष्ट्र ध्वज में पृथ्वी ग्रह को शामिल किया जाये, उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर तो मैं हर मंच पर विगत चार बरस से बोल रहा हूँ। साथ ही प्रस्तावना में जीवनचक्र के मूल प्राकृतिक संसाधन जल, जंगल, जमीन, वायु, गगन, ऊष्मा आदि पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को संविधान की प्रस्तावना में शामिल करने की नितांत आवश्यकता है। मैंने इसकी जागरूकता के लिये पदयात्रा कीं, पुस्तक लिखी; राष्ट्रीय-अन्तररष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया; आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। डॉ. जावैद ने ज़ोर देकर कहा कि जब भारत ये ऐतिहासिक कार्य करेगा तो अन्य देश भी प्रेरित होकर इसका अनुसरण करेंगे। वनस्पति शास्त्री पर्यावरणविद प्रो. विद्यानाथ झा ने स्थानीय निवासी बिन्दू यादव से बातचीत की; अस्सी वर्षीय बिन्दू यादव ने प्रो. विद्यानाथ झा को बताया कि यही वह कमला नदी है जिसका पानी भोज में प्रयोग होता था। वहीं एक महिला ने बताया कि हम सब भानस (रसोई) में कमलाक जल प्रयोग करैत रहिल। प्रो. झा ने अपने वक्तव्य में आगे कहा कि नदी सत्याग्रह का यह अभियान पिछले वर्ष से चल रहा है। स्थानीय निवासियों को भी चाहिये कि वह कमला पर सचेत हों, जब सबलोग सचेत होंगे तब सरकार तक बात को पहुँचेगी। भारत-नेपाल कमला मैत्री मंच के संयोजक अजीत कुमार मिश्र ने नदियों पर गम्भीर चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बाँध बनाना, धाराओं को ज़बरदस्ती मोड़ना, नदियों से मशीनों द्वारा बालू निकालना, नदियों के किनारे अवैध निर्माण कार्य करना और विभिन्न प्रकार के कचरों को नदियों में यूँ ही बहा देना- कुछ ऐसे असंवेदनशील क़दम हैं जिनसे कमोबेश सभी नदियाँ संकट से घिर रही हैं। कमला भी उससे अछूती नहीं है। इसके लिये समाज के हर वर्ग को जागरूक होना होगा।

बाल कल्याण समिति की पूर्व सदस्या इन्दिरा कुमारी ने भी कमला के संकट पर गहरी चिन्ता व्यक्त की। इन्दिरा जी ने गाँव की महिलाओं से आह्वान किया कि वो नदियों के लिये कंधे से कंधा मिलाकर आगे आयें। बाढ़ मुक्ति अभियान के उमेश राय ने कहा कि मिथिला की सभी संस्थाओं को साथ लाकर योजनाबद्ध तरीक़े से काम करने की ज़रुरत है और सरकार तक बात लेजाने की आवश्यकता है। पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रवि शंकर भगत एवं डॉ. शारदा नन्द चौधरी ने भी अपने वक्तव्य में देश में नदी के घटते जल स्तर और सूखी कमला पर गहरी चिन्ता व्यक्त की। इस अवसर पर कानपूर से शाहिद सिद्दीकी, शिव कुमार यादव, क़िबलतैन, सक़लैन, राम वृक्ष यादव, अमर नाथ चौधरी, शिव जी यादव, राधे कृष्णा मन्दिर के महन्त चन्द्र किशोर, महेश यादव, सुभाष कुल्लू, रोहित यादव, राज कुमार यादव, सुनीता, जानकी देवी, विकास (गंज) एवं गौतम आदि सहित अन्य लोग उपस्थित थे। इस बैठक की अध्यक्षता धोई घाट ग्राम पंचायत के राम अवतार शर्मा (मुखिया) ने की।












