-बिहार पंचायत चुनाव 2026 में बड़े बदलाव, आरक्षित सीटों से लेकर ईवीएम तक नई व्यवस्था
पटना।ब्यूरो।
बिहार में वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव इस बार कई मायनों में अलग और ऐतिहासिक होंगे। पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि आगामी पंचायत चुनाव में राज्य की सभी पंचायत स्तरीय आरक्षित सीटों में बदलाव होगा। यह बदलाव पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत निर्धारित रोस्टर के अनुसार किया जाएगा।
बिहार में पंचायत चुनाव त्रिस्तरीय व्यवस्था के तहत होते हैं, जिसमें ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद शामिल हैं। राज्य में कुल 8053 ग्राम पंचायत, 533 पंचायत समिति और 38 जिला परिषदें हैं। वहीं ग्राम पंचायत स्तर पर वार्डों की संख्या लगभग 1.15 लाख है। पंचायती राज विभाग के अनुसार कुल पंचायत प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 2.48 लाख है, जिसमें पंच, सरपंच, वार्ड पार्षद, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जिला पार्षद शामिल हैं।
50 प्रतिशत महिला आरक्षण की सीटों में होगा फेरबदल:
मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि बिहार में पंचायत चुनाव में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान है। ऐसे में जहां वर्तमान में महिला प्रतिनिधि निर्वाचित हैं, वहां इस बार पुरुष उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे और जहां पुरुष प्रतिनिधि हैं, वहां महिलाओं के लिए सीट आरक्षित होगी। इसके साथ ही एससी, एसटी, ओबीसी और ईबीसी वर्गों के लिए भी आरक्षण का रोस्टर बदलेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार पंचायत चुनाव बिना नए परिसीमन के ही कराए जाएंगे और यह चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर होंगे, क्योंकि 2021 की जनगणना कोरोना महामारी के कारण नहीं हो सकी थी।
हर 10 साल में बदलता है आरक्षण रोस्टर:
मंत्री ने कहा कि पंचायती राज अधिनियम के तहत हर 10 वर्ष में आरक्षित सीटों के रोस्टर में बदलाव किया जाता है। 2026 के पंचायत चुनाव के लिए भी यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है और राज्य निर्वाचन आयोग रोस्टर तैयार करने में जुटा हुआ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी चुनाव समय पर संपन्न कराए जाएंगे।

सभी पदों के लिए ईवीएम का होगा इस्तेमाल:
पंचायत चुनाव 2026 में पहली बार सभी छह पदों के लिए मल्टी पोस्ट ईवीएम का उपयोग किया जाएगा। एक कंट्रोल यूनिट के साथ छह बैलट यूनिट रहेंगी। मंत्री ने बताया कि इससे चुनाव संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी, उपकरणों की संख्या कम होगी और खर्च में भी बचत होगी। पिछले पंचायत चुनाव में पंच और सरपंच के चुनाव बैलट पेपर से कराए गए थे।
मतदान में फेसियल रिकॉग्निशन तकनीक:
आगामी पंचायत चुनाव में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि मतदान के दौरान फेसियल रिकॉग्निशन तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे बोगस वोटिंग पर रोक लगेगी। यदि कोई मतदाता दोबारा वोट डालने की कोशिश करेगा तो उसकी पहचान तुरंत हो जाएगी।
इसके अलावा मतगणना के दौरान ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। मतगणना मैन्युअल भी होगी और पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग भी की जाएगी, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
तकनीक से बढ़ेगी सुविधा, जनप्रतिनिधियों को दी जा रही ट्रेनिंग:
डिजिटल साक्षरता को लेकर मंत्री ने बताया कि पंचायती राज विभाग समय-समय पर जनप्रतिनिधियों के लिए वर्कशॉप और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। डीपीआरसी और एसपीआरसी के माध्यम से वर्षभर प्रशिक्षण चलता रहता है। चुनाव प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल से मतदाताओं और प्रशासन दोनों को सहूलियत मिलेगी।
रोजगार गारंटी योजना में नए प्रावधान:
मनरेगा का नाम बदले जाने के सवाल पर मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि इसे महात्मा गांधी के नाम को हटाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। योजना के कंटेंट को बेहतर किया गया है और अब 100 दिन की जगह 125 दिन रोजगार की गारंटी दी गई है।
उन्होंने कहा कि पहले रोजगार तो मिलता था, लेकिन स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण नहीं हो पाता था। नए प्रावधानों के तहत दीर्घकालिक और उत्पादक कार्यों पर जोर दिया जा रहा है।
ग्रामीण विकास को मिलेगा नया आयाम:
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के विजन के अनुरूप पंचायत और ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत किया जा रहा है। रोजगार के साथ-साथ स्थायी संपत्तियों के निर्माण से गांवों का समग्र विकास होगा। केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G-RAM) करने को लेकर संसद में विधेयक भी प्रस्तुत किया है।











