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परंपरा की लौ: बन्दरा में कुम्हारों के चाक पर घूम रही दीपावली की रौनक

-परंपरा की लौ: बन्दरा में कुम्हारों के चाक पर घूम रही दीपावली की रौनक

मुजफ्फरपुर/बन्दरा। दीपक कुमार तिवारी।

दीपावली नजदीक आते ही गांवों में फिर से परंपरा की चमक लौट आई है। शनिवार को धनतेरस है, और इस अवसर पर प्रखंड के विभिन्न इलाकों—रतवारा, बन्दरा, केवट्सा तीन टोलवा, हत्था आदि जगहों पर मिट्टी के दीपक बनाने का कार्य जोरों पर है। कुम्हारों का चाक लगातार घूम रहा है और उनके हाथों से सुंदर-सुंदर परंपरागत दीप आकार ले रहे हैं।

कुम्हारों का कहना है कि आधुनिक युग में रंग-बिरंगी मोमबत्तियों और इलेक्ट्रॉनिक लाइटों की भरमार के बावजूद भी मिट्टी के दीपक का अपना अलग ही महत्व है। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में आज भी लोग मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता देते हैं।

केवट्सा तीनटोलवा के कुम्हार धनेश्वर पंडित बताते हैं कि “आजकल लोगों को रंगीन और डिज़ाइनर दीप ज्यादा पसंद आते हैं। हालांकि गांवों में साधारण दीपों की ही अधिक मांग है। कलर दीप थोड़े महंगे बिकते हैं, पर युवाओं और बच्चों में इनकी चाह बढ़ी है।”

इन कुम्हारों के लिए यह त्योहारी मौसम रोज़गार का बड़ा सहारा बनता है। कई परिवार अब भी पुराने लेन-देन की परंपरा निभा रहे हैं — वे पैसों की जगह अनाज लेकर दीपक देते हैं। बाजार में जहां एक सौ रुपये में एक सैकड़ा दीप बिकते हैं, वहीं अनाज पर एक किलो के बदले 30 से 35 दीपक दिए जाते हैं।

त्योहार की रौनक के बीच ये परंपरागत कुम्हार आज भी मिट्टी की महक और संस्कृति की लौ जलाए हुए हैं।

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