-नौ दिनों बाद संजय के घर जला चूल्हा, बेटे के जिंदा होने की खबर मिलते ही खुशी में बदला मातम
जनकपुरधाम। मिश्री लाल मधुकर। नेपाल में 26 अगस्त को आई प्रलयकारी बाढ़ में त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे मैकेनिकल इंजीनियर ई. संजय साह के परिवार में नौ दिनों बाद खुशियां लौट आईं। संजय के जिंदा होने और अस्पताल में सुरक्षित होने की खबर मिलते ही सप्तरी जिले के कोइलाड़ी नगरपालिका-8 स्थित उनके घर में नौ दिनों बाद चूल्हा जला।
संजय के लापता होने की खबर से उनके माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। मां कपूर देवी लगातार रोने के कारण बिस्तर पकड़ चुकी थीं, जबकि पिता रामफल साह भी बेटे की चिंता में टूट चुके थे। परिवार के लिए पिछले नौ दिन बेहद मुश्किल भरे रहे।
शुक्रवार को करीब 10 बजे संजय के मामा को अस्पताल से संजय से फोन पर बात कराई गई। मामा ने जब संजय के सुरक्षित होने की जानकारी उनके माता-पिता को दी तो परिवार में मातम का माहौल अचानक खुशी में बदल गया। बेटे के जिंदा होने की खबर सुनते ही बिस्तर पर पड़ी मां कपूर देवी में जैसे नई जान आ गई। उन्होंने खुद खाना बनाया और पति रामफल साह तथा छोटे पुत्र संजीव साह को खाना खिलाया। इसके बाद स्वयं भी भोजन किया और अपने बेटे से मिलने के लिए काठमांडू रवाना हो गईं।

संजय के सुरक्षित होने की खबर गांव में आग की तरह फैल गई। जिन ग्रामीणों के चेहरे पिछले कई दिनों से चिंता और मायूसी से भरे थे, वे अब परिवार को ढांढस बंधाने नहीं, बल्कि खुशी का इजहार करने घर पहुंचने लगे।
संजय के पिता रामफल साह ने भावुक होकर कहा कि संजय छात्र जीवन से ही भगवान कृष्ण के भक्त रहे हैं। वह नियमित रूप से इस्कॉन मंदिर भी जाते थे। उन्हें विश्वास है कि भगवान कृष्ण ने ही उनके बेटे को दोबारा जीवन दिया है।
वहीं, सुरंग से सुरक्षित निकलने के बाद संजय साह ने पत्रकारों को बताया कि जब वह सुरंग में फंसे थे, तब कठिन परिस्थितियों के बीच वह लगातार ‘राधे-कृष्ण’ मंत्र का जाप करते रहे। उनका कहना था कि संकट की उस घड़ी में भगवान का स्मरण उन्हें मानसिक मजबूती देता रहा।
ई. संजय साह त्रिशूली जलविद्युत परियोजना-3ए में मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। नौ दिनों तक सुरंग में फंसे रहने के बाद उनके सुरक्षित होने की खबर ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव में राहत और खुशी की लहर पैदा कर दी है।












