-नीतीश सरकार का ‘डिप्टी सीएम आउट’ खेल?
-बीजेपी के हिस्से वाले विभागों में भी हाशिए पर उपमुख्यमंत्री
दीपक कुमार तिवारी। नई दिल्ली/पटना।
बिहार की एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके दोनों भाजपा कोटे के डिप्टी सीएम, सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा, के बीच बढ़ती खटास चर्चा का विषय बन रही है। ताजा विवाद सरकारी विज्ञापनों से दोनों डिप्टी सीएम के नाम गायब होने का है। हाल ही में पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा जारी विज्ञापन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम तो प्रमुखता से दिखा, लेकिन दोनों उपमुख्यमंत्रियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
भाजपा कोटे का विभाग, फिर भी बीजेपी उपमुख्यमंत्रियों को बाहर क्यों?
7 दिसंबर को अखबारों में छपे पूरे पन्ने के विज्ञापन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उद्घाटनकर्ता के रूप में प्रमुखता से दिखे। वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा कोटे की मंत्री रेणु देवी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में नीतीश के करीबी विजय चौधरी और शिक्षा मंत्री सुनील कुमार शामिल थे। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि भाजपा के दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा का नाम नदारद था।
क्या चल रहा है नीतीश कुमार का ‘खेल’?
राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा के उपमुख्यमंत्रियों को रणनीतिक रूप से हाशिए पर डाल रहे हैं। पहले, सरकारी विज्ञापनों में दोनों डिप्टी सीएम का नाम बारी-बारी से हटाया गया, और अब उन्हें पूरी तरह से विज्ञापनों और आयोजनों से बाहर कर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग भाजपा कोटे में है।

बीजेपी में गुस्सा, नई रणनीति के संकेत:
भाजपा खेमे में इस मामले को लेकर नाराजगी है। पार्टी के अंदर यह सवाल उठ रहा है कि नीतीश कुमार की यह चाल कहीं एनडीए सरकार में दरार डालने की कोशिश तो नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम नीतीश कुमार की पुरानी रणनीति की याद दिलाता है, जब उन्होंने 2013 में भाजपा से नाता तोड़ा था।
दूध उत्पादन संयंत्र परियोजना के जरिए संदेश देने की कोशिश?
मुख्यमंत्री ने गोपालगंज जिले में 1 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के दुग्ध उत्पादन संयंत्र का भूमि पूजन किया। इस परियोजना से क्षेत्र के पशुपालकों को लाभ और रोजगार की संभावना है। लेकिन इस आयोजन के जरिए नीतीश कुमार ने भाजपा कोटे के नेताओं को दरकिनार करते हुए अपनी पकड़ मजबूत दिखाने की कोशिश की है।
क्या बीजेपी-नीतीश गठबंधन में टूट की आहट?
यह घटनाक्रम सवाल खड़ा करता है: क्या नीतीश कुमार भाजपा कोटे के उपमुख्यमंत्रियों को कमजोर कर अपने पुराने सियासी खेल को दोहरा रहे हैं? या फिर यह केवल एक प्रशासनिक चूक है? भाजपा के भीतर मंथन शुरू हो चुका है, और आने वाले दिनों में गठबंधन में खटास और बढ़ सकती है।
#बिहार_राजनीति #नीतीश_सरकार #BJP #डिप्टी_सीएम_आउट












