-डिजिटल शिक्षा के महत्व से छात्रों को कराया अवगत, एआई के उपयोग और चुनौतियों पर हुई चर्चा
राजापाकर/संजय श्रीवास्तव। ब्रज मोहन दास महाविद्यालय, दयालपुर में आईक्यूएसी (आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ) के तत्वावधान में शिक्षा के क्षेत्र में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग को लेकर छात्र जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) श्याम रंजन प्रसाद सिंह ने की, जबकि मंच संचालन डॉ. नागेश्वर कुमार ने किया।
कार्यक्रम में वक्ता डॉ. पुष्पा कुमारी ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि आज के छात्र डिजिटल दुनिया का भविष्य हैं। तकनीक के माध्यम से कम समय में घर बैठे कई कार्य आसानी से किए जा रहे हैं। ऐसे में छात्रों को तकनीकी रूप से जागरूक और दक्ष होना जरूरी है।
मुख्य वक्ता डॉ. रवि चंद्र ने कहा कि डिजिटल दुनिया का सदुपयोग करने के लिए जागरूकता आवश्यक है। महाविद्यालय में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है, जिसके माध्यम से छात्र घर बैठे किताबें पढ़ सकते हैं। ऑनलाइन शिक्षण वीडियो और डिजिटल संसाधनों की मदद से उन पुस्तकों एवं विषयों की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं, जो आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

प्रो. राकेश कुमार ने आईसीटी की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्मार्ट क्लास के माध्यम से डिजिटल शिक्षा को प्रभावी बनाया जा सकता है। किसी विषय को समझने में कठिनाई होने पर चित्रों और एनिमेशन के जरिए उसे आसानी से समझा जा सकता है। उन्होंने छात्रों को डिजिटल तकनीक अपनाने और पढ़ाई में चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. (डॉ.) श्याम रंजन प्रसाद सिंह ने कहा कि आज पूरी दुनिया डिजिटल हो चुकी है और भारत भी डिजिटल तकनीक को अपना रहा है। हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि भविष्य में एआई की दुनिया में मनुष्य की भूमिका क्या होगी। उन्होंने कहा कि इंटरनेट के इस्तेमाल के दौरान व्यक्तिगत सूचनाओं की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। एआई जहां जटिल समस्याओं के समाधान और बीमारियों के सटीक विश्लेषण में मददगार साबित हो रहा है, वहीं इसके शुरुआती दौर में गलत सूचनाओं की चुनौती भी मौजूद है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एआई लोगों की रुचि के अनुसार सामग्री उपलब्ध करा रहा है। ऐसे में इसका विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी है।
कार्यक्रम में डॉ. सौरव कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रवि चंद्र ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने वक्ताओं के विचारों को सुना और डिजिटल शिक्षा एवं तकनीक के उपयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।












