-जनकपुरधाम त्रेता युग से ही ज्ञान, दर्शन और विद्वता का केंद्र रहा है: पीएम ओली
-राजर्षि जनक विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री का संबोधन
जनकपुरधाम | मिश्री लाल मधुकर ।
प्रधानमंत्री एवं कुलपति पी.एम. ओली ने कहा कि जनकपुरधाम त्रेता युग से ही ज्ञान, दर्शन और विद्वता का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां अष्टावक्र, याज्ञवल्क्य और पाणिनि जैसे मनीषियों ने ज्ञान की गंगा बहाई। वे महेंद्र नारायण निधि सांस्कृतिक केंद्र के सभागार में आयोजित राजर्षि जनक विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि यह अत्यंत गर्व की बात है कि चार हजार वर्षों के बाद इस भूमि पर राजर्षि जनक विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है। उन्होंने स्वीकार किया कि शासकीय अव्यवस्था और राजनीतिक स्वार्थों के कारण विश्वविद्यालय की स्थापना में विलंब हुआ।
“पाश्चात्य देशों से पहले नेपाल में विश्वविद्यालय की परंपरा थी, जहां विविध विषयों की उच्च शिक्षा दी जाती थी। आज हम अपने महान ऋषियों और विद्वानों को भूलते जा रहे हैं, यह चिंताजनक है,” प्रधानमंत्री ओली ने कहा।
उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि विश्वविद्यालय के छात्र अब अपने पहले दीक्षांत समारोह में सम्मानित हो रहे हैं और यह ऐतिहासिक क्षण जनकपुरधाम की सांस्कृतिक गरिमा को और समृद्ध कर रहा है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए उपकुलपति डॉ. जय नाथ प्रसाद यादव ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि अल्प अवधि में 2008 छात्र विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हैं। इस प्रथम दीक्षांत समारोह में 114 छात्र—स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के—दीक्षित हुए।
दीक्षांत समारोह में जनकपुरधाम के शिक्षा जगत, प्रशासन और समाजसेवा क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के विकास, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।














