Advertisement

गायघाट में विकास और जनसमस्याओं पर केंद्रित होगा वोटिंग का रुझान

-गायघाट में विकास और जनसमस्याओं पर केंद्रित होगा वोटिंग का रुझान

-नागरिक नाराज, अधूरे पुल, सड़कों और शिक्षा-सुविधाओं की मांग बनी चुनावी मुद्दा
-शिक्षा,स्वास्थ्य,यातायात से जुड़ी जनसमस्याओं से है परेशानी

 

मुजफ्फरपुर। दीपक कुमार तिवारी।

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बन्दरा,गायघाट एवं कटरा क्षेत्र के मतदाताओं का रुझान इस बार स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ा दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अबकी वोट “विकास” और “समाधान” के आधार पर पड़ेगा। अंदर ही अंदर जनता में नेताओं के प्रति नाराजगी का माहौल है, क्योंकि वर्षों से चली आ रही समस्याओं का अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि विधानसभा एवं प्रखण्ड क्षेत्र का बड़ा हिस्सा एवं खेती योग्य इलाका हर साल 3 से 5 महीने तक जलजमाव से जूझता है, जिससे रबी फसलों को भारी नुकसान होता है। किसानों और मजदूरों की आर्थिक स्थिति पर इसका सीधा असर पड़ता है। नहरों का निर्माण, नदी की उड़ाही और गाद हटाने जैसे कार्य अब तक अधूरे हैं। पुरानी बागमती की मृत एवं गाद युक्त नदी से गायघाट एवं बन्दरा का बॉर्डर क्षेत्र के कई ग्रामीण इलाका, सियारी में गाद से गायघाट के पूर्वी क्षेत्र का कई ग्रामीण हिस्सा प्रभावित है।बागमती और बूढ़ी गंडक नदी के जर्जर या टूटे तटबंधों की मरम्मती न होने से हर साल बाढ़ की तबाही झेलनी पड़ती है। बन्दरा क्षेत्र की बूढ़ी गण्डक नदी की सम्पूर्ण बांध क्षेत्र सालों से जर्जर है।बांध रोड का निर्माण नहीं हुए।सलुइस गेटों का जीर्णोद्धार नहीं हुए।

रतवारा में बूढ़ी गंडक नदी पर पुल निर्माण की मांग वर्षों से अधूरी है। वहीं, बन्दरा-गायघाट क्षेत्र के खनुआ घाट, लोहरखा, केवट्सा, धोबौली, रजुआ, मधुरपट्टी, हरिपुर, सतघट्टा, कटरा पीपापुल स्थल पर स्थायी पुल समेत नई-पुरानी बागमती के दर्जन भर घाटों पर पुल निर्माण की मांग अब भी अधूरी है। निवर्तमान जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता को लेकर लोगों में नाराजगी है।

ग्रामीणों ने बताया कि कई मुख्य सड़कों की हालत बेहद खराब है। सकरी–खनुआ–हत्था, हत्था–केवट्सा, सकरी पुल से भिरारी पथ,कोठी–सखौरा, सकरी स्कूल–भराव टोला, सकरी पुल–बाघमारा पुलिया पथ जैसे मार्ग वर्षों से निर्माण की प्रतीक्षा में हैं।सकरी-खनुआ,हत्था त्रिमहान पथ सहित कई सड़कों का तो शिलान्यास भी हो गया, पर कार्य शुरू नहीं हुआ।

नल-जल योजना की अनियमित आपूर्ति,कई विद्यालयों में भवन या चहारदीवारी की कमी, तथा सकरी मन,रामपुरदयाल और गोविंदपुर छपरा की एपीएचसी को 100 बेड वाले अस्पताल में नहीं बदले जाने पर भी ग्रामीणों ने असंतोष जताया। बन्दरा में डिग्री कॉलेज और विधानसभा क्षेत्र में आईटी कॉलेज की मांग भी अधूरी रह गई है। सब्जी मंडी की मांग भी सपना रह गया।

किसानों और मजदूरों का कहना है कि वे अब किसी लालच में नहीं आने वाले। एक किसान ने कहा — “हम लोग अब वोट उसी को देंगे जो सच में काम करेगा। नेता लोग आते हैं, वादे करते हैं, पर बाद में कोई नहीं दिखता।”

इस बार का चुनावी माहौल बन्दरा और गायघाट में नेताओं के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। जनता अब भावनाओं से नहीं, अपने अधिकारों और विकास के मुद्दों पर वोट करने का मन बना रही है।