-गर्भवतियों को पोषण देने वाली सुधा की किट ही हो गईं एक्सपायर, पीएचसी की व्यवस्था पर उठे सवाल
-दानापुर-खगौल पीएचसी के डिलीवरी कक्ष में रखी थीं पोषण किट
-समय पर वितरण नहीं होने से जरूरतमंद महिलाओं को नहीं मिल सका लाभ
पटना। गर्भवती महिलाओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही सरकारी पहल दानापुर-खगौल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। यहां गर्भवती महिलाओं को वितरित की जाने वाली सुधा की पोषण आहार किट एक्सपायर हो गईं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, ये किट स्वास्थ्य केंद्र के डिलीवरी कक्ष में रखी थीं, लेकिन समय पर वितरण नहीं होने के कारण इनकी वैधता समाप्त हो गई। जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचने के बजाय पोषण सामग्री का एक्सपायर हो जाना स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल प्रबंधन समय रहते पोषण किट का वितरण कर देता, तो कई गर्भवती महिलाओं को इसका लाभ मिल सकता था। गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार मां और बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में महिलाओं के लिए उपलब्ध कराई गई पोषण सामग्री का इस्तेमाल होने से पहले ही एक्सपायर हो जाना चिंता का विषय है। सवाल उठ रहा है कि जब स्वास्थ्य केंद्र में किट उपलब्ध थीं, तो उन्हें समय पर लाभार्थियों तक क्यों नहीं पहुंचाया गया।

पोषण किट के पैकेट पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह सामग्री केवल स्वास्थ्य विभाग के लिए है और खुदरा बिक्री के लिए नहीं है। पैकेट पर इसके इस्तेमाल की विधि भी अंकित है। ऐसे में किट की आपूर्ति, भंडारण और वितरण से संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि सामग्री कब उपलब्ध कराई गई थी और वितरण में देरी के पीछे क्या कारण रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पोषण किट पीएचसी के डिलीवरी कक्ष में रखी थीं। इससे उनके भंडारण, निगरानी और समय पर वितरण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध सामग्री की वैधता पर नजर रखना और उसे समय रहते लाभार्थियों तक पहुंचाना संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी है। हालांकि, कितनी किट एक्सपायर हुईं, उनकी वैधता कब समाप्त हुई और वितरण में देरी क्यों हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि पीएचसी प्रभारी इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाली हैं। इस बीच पोषण किट एक्सपायर होने का मामला सामने आने से अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, प्रभारी की सेवानिवृत्ति और किट एक्सपायर होने के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। लोगों ने मामले की जांच कर जिम्मेदार कर्मियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने कहा कि दानापुर-खगौल पीएचसी प्रबंधन से पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी। उन्होंने इसे सरासर लापरवाही बताते हुए कहा कि जो लोग दोषी पाए जाएंगे, उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि पोषण किट के वितरण में देरी किन कारणों से हुई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।












