-काठमांडू में ‘हिमालिनी हिन्दी संवर्धन सम्मान 2026’ का भव्य आयोजन, मेधावी विद्यार्थी और शिक्षक हुए सम्मानित
जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। डॉ. कृष्णचंद्र मिश्र पब्लिकेशन प्रा. लि. के तत्वावधान में आयोजित ‘हिमालिनी हिन्दी संवर्धन सम्मान 2026’ समारोह का भव्य आयोजन काठमांडू स्थित डीएवी सुशील केडिया विश्व भारती स्कूल के प्रतीक सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले शिक्षकों और विभिन्न विद्यालयों के उत्कृष्ट विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि गीतांजली ब्रैंडन ने कहा कि हिमालिनी संस्था हिन्दी भाषा के संवर्धन और विकास के लिए सराहनीय कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि संस्था के प्रयासों से हिन्दी की गतिशीलता और लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
विशिष्ट अतिथि एवं डीएवी सुशील केडिया विश्व भारती स्कूल के अध्यक्ष अनिल केडिया ने कहा कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि अध्यात्म, संस्कृति और चेतना की भाषा है। उन्होंने कहा कि हिन्दी का अध्ययन बच्चों में अच्छे संस्कारों का विकास करता है और उन्हें भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हिमालिनी के निदेशक ई. सच्चिदानंद मिश्र ने की। उन्होंने कहा कि संस्था के लिए यह गौरव का विषय है कि वह लगातार मेधावी विद्यार्थियों और हिन्दी शिक्षकों को सम्मानित कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम दयाल राकेश, त्रिभुवन विश्वविद्यालय के हिन्दी केंद्रीय विभाग की विभागाध्यक्ष एवं हिमालिनी हिन्दी मासिक पत्रिका की संपादक डॉ. श्वेता दीप्ति ने भी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के हिन्दी शिक्षक-शिक्षिकाओं को ‘भाषा गौरव शिक्षक सम्मान’ से नवाजा गया।
स्वागत भाषण में डॉ. श्वेता दीप्ति ने कहा कि विद्यार्थियों को सम्मानित करने की हिमालिनी की परंपरा हिन्दी भाषा के प्रति नई पीढ़ी में उत्साह और आत्मविश्वास पैदा करती है। उन्होंने उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सहभागिता से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ी है।
सम्मानित विद्यार्थियों में आलोक विद्याश्रम के वंश सारावगी और डीएवी की एंजल भारद्वाज विशेष आकर्षण रहे। दोनों छात्रों ने हिन्दी विषय की बोर्ड परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। अपने अनुभव साझा करते हुए वंश सारावगी ने कहा कि गुरु का सम्मान जीवन की सबसे बड़ी सीख है, जबकि एंजल भारद्वाज ने विद्यालय को मंदिर की संज्ञा देते हुए माता-पिता और शिक्षकों के प्रति सदैव सम्मान बनाए रखने का संदेश दिया।
समारोह में संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति प्रो. डॉ. श्री कुल प्रसाद कोइराला, पोखरा विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति प्रो. डॉ. प्रेम अर्याल, सत्य सनातन मैत्री संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार कर्ण, नेपाल-भारत मैत्री समाज के अध्यक्ष प्रेम लश्करी, मधेशी आयोग के पूर्व अध्यक्ष विजय दत्त, मदन मोहन मालवीय मिशन के अध्यक्ष गोरखनाथ, अंतरराष्ट्रीय हिन्दी परिषद नेपाल के अध्यक्ष एवं पूर्व सचिव नागेन्द्र झा, प्रो. आभारानी मिश्र, साहित्यकार एवं पत्रकार विजेता चौधरी, प्रतिमा चौधरी, गायिका एवं पत्रकार स्मृति मिश्र, पत्रकार मोहन सिंह, विजय यादव सहित अनेक शिक्षाविद, साहित्यकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से हिन्दी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी में उसके प्रति रुचि बढ़ाने का संदेश दिया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहनीय पहल बताया।












