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इस बार कर्तव्य पथ पर दिखेगा बिहार का जादू

-इस बार कर्तव्य पथ पर दिखेगा बिहार काजादूl

-देख हर कोई रह जाएगा हैरान

ब्यूरो। पटना/नई दिल्ली।

नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड 2025 में बिहार की झांकी एक विशेष आकर्षण होगी।इस वर्ष की थीम “स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास” के तहत बिहार सरकार ने अपनी झांकी के माध्यम से राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है।
बिहार की झांकी में राज्य की ज्ञान और शांति की प्राचीन परंपरा को प्रदर्शित किया गया है। केंद्र में भगवान बुद्ध की 70 फीट ऊँची भव्य मूर्ति है, जो राजगीर के घोड़ा कटोरा झील में स्थित है। यह मूर्ति न केवल शांति का संदेश देती है, बल्कि इको-टूरिज्म के क्षेत्र में बिहार सरकार के प्रयासों का प्रतीक भी है। हर साल लाखों पर्यटक इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व का अनुभव करने आते हैं।
बिहार की झांकी में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेषों को भी शामिल किया गया है। यह स्थान प्राचीन भारत के विश्वस्तरीय शिक्षा केंद्र के रूप में प्रसिद्ध था, जहाँ चीन, जापान और मध्य एशिया से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे। बिहार सरकार ने इस ऐतिहासिक स्थल को पुनर्जीवित करने और इसे यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं।


राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्निर्माण बिहार सरकार की विरासत और विकास की परिकल्पना को साकार करता है। पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों से बना यह विश्वविद्यालय कार्बन-न्यूट्रल और नेट ज़ीरो कैम्पस के रूप में स्थापित किया गया है। आधुनिक संरचना में प्राचीन वास्तुकला के तत्व, जैसे सारिपुत्र स्तूप और पारंपरिक बरामदे, स्पष्ट रूप से झलकते हैं। प्रधानमंत्री द्वारा 2024 में इसका उद्घाटन किया गया।
राजगीर में खेल परिसर और बिहार खेल विश्वविद्यालय की स्थापना से राज्य खेलों के क्षेत्र में भी अग्रसर हो रहा है। हाल ही में बिहार वीमेंस एशियन चैंपियंस ट्रॉफी का सफल आयोजन राज्य के खेल विकास में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
गणतंत्र दिवस पर बिहार की झांकी न केवल राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को प्रदर्शित करेगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि कैसे विरासत और विकास एक साथ चलते हैं। ज्ञानभूमि नालंदा, भगवान बुद्ध की मूर्ति, और इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित घोड़ा कटोरा झील के माध्यम से बिहार ने अपनी धरोहर को संजोने और राज्य को वैश्विक शिक्षा और पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने का प्रयास किया है।