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अयोध्या से पधारे कथावाचक ने सुनाया श्रीकृष्ण बाल चरित्र एवं रासलीला का रहस्य

-अयोध्या से पधारे कथावाचक ने सुनाया श्रीकृष्ण बाल चरित्र एवं रासलीला का रहस्य

-श्रोताओं ने तालियों से गुंजाया कथा पंडाल

-गुलाबी ठंड भरी सांझ(सन्ध्या) में माहौल बना भक्तिमय

मुजफ्फरपुर/बन्दरा। दीपक तिवारी।

मतलुपुर स्थित बाबा खगेश्वर नाथ महादेव मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे सत्र में सोमवार को अयोध्या धाम से पधारे आचार्य श्रीदास कमलेश जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल चरित्र और गोवर्धन लीला का दिव्य वर्णन किया।

महाराज श्री ने रासलीला के रहस्य को उजागर करते हुए बताया कि व्रज की कोई भी गोपी भौतिक शरीर से रासमंडल में नहीं गईं। उनके पति, पिता और पुत्रों ने उन्हें घरों में रोक दिया था, परंतु वे सब आत्मभाव से भगवान श्रीकृष्ण के साथ रासमंडल में उपस्थित हुईं। उन्होंने कहा कि वे गोपियाँ साधारण नहीं थीं—कुछ साधन-सिद्ध थीं, तो कुछ वही ऋषि थे जो भगवान राम के समय दंडकारण्य में भगवान से प्रणय रूप में मिलन की कामना किए थे। भगवान ने उन्हें द्वापर में कृष्ण रूप में वह आनंद प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया था।

महाराज जी ने आगे कहा कि कई गोपियाँ वेद की ऋचाओं का ही मूर्तिमान स्वरूप थीं, जिन्होंने भगवान के साथ नृत्य का आनंद लिया। उन्होंने कहा—“जो लोग इस रहस्य को नहीं जानते, वे आक्षेप करते हैं, लेकिन शास्त्र का मर्म समझने के लिए किसी ज्ञानी संत के पास बैठकर सुनना चाहिए, तभी सभी प्रश्नों का समाधान संभव है।”

इस अवसर पर अमृतेश (बब्लू सर), गोपाल जी त्रिवेदी, राकेश त्रिवेदी, पवन ठाकुर सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा अमृत का रसपान किया।

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