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सिकरहना नदी पर बांध बनाने के विरोध में उतरे पूर्व मंत्री व विधायक

-सिकरहना नदी पर बांध बनाने के विरोध में उतरे पूर्व मंत्री व विधायक

– बंगाल में नैनो प्लांट के विरोध की तरह आंदोलन की चेतावनी

मोतिहारी / राजन द्विवेदी।

सरकार की योजनाएं लोगों की सुविधा के लिए होती है, लेकिन जब सरकार की योजनाएं संबंधित लोगों को अभिशाप लगने लगे तो उसका विरोध शुरु होता है। सिकरहना नदी पर 56 किलोमीटर बनने वाले तटबंध का पूर्वी चंपारण के सुगौली, बंजरिया और मोतिहारी सदर प्रखंड के ग्रामीण विरोध कर रहे थे। अब ग्रामीणों को लगभग सभी दलों के नेताओं समर्थन किया है। इनमें पूर्व मंत्री, वर्तमान और पूर्व विधायक शामिल हैं।
मोतिहारी स्थित प्रेस क्लब में शनिवार को एक सर्वदलीय बैठक हुई. नरकटिया के राजद विधायक व पूर्व मंत्री डॉ.शमीम अहमद, कल्याणपुर के विधायक व राजद जिलाध्यक्ष मनोज यादव, निर्दलीय विधान पार्षद महेश्वर सिंह, पूर्व मंत्री व भाजपा नेता राम चंद्र सहनी, कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद, जदयू नेता गोविंद सिंह समेत कई नेता मौजूद रहे. विधायकों व अन्य नेताओं के अलावा आंदोलित ग्रामीणों ने तटबंध के निर्माण को लेकर किसी भी हद तक जाने की बात कही है। बैठक के बाद राजद विधायक व पूर्व मंत्री डॉ. शमीम अहमद ने कहा कि सरकार की यह योजना जनता को डूबाने के लिए आई है। जब हमलोग सरकार में थे, उस समय इस योजना पर चर्चा चली थी। लेकिन उसको लेकर सीएम से मिला था तो यह रुका हुआ था। लेकिन इसी जून में कैबिनेट से यह योजना पास हो गयी, जिस तरह पास हुई है, उसी तरह इसे वापस ले लिया जाए। क्योंकि इससे जनता को कोई फायदा नहीं है। कल्याणपुर विधायक और राजद जिलाध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि हमलोग इसका पूरा विरोध कर रहे हैं। यहां के प्रभारी मंत्री सुनील कुमार से भी हमलोगों का शिष्टमंडल मिला था। बीस सूत्री के बैठक में सर्वसम्मति से बांध के निर्माण का विरोध हुआ था।

डीएम भी मानते हैं कि यह आवश्यक काम नहीं है। जबरदस्ती अगर सरकार इस पर काम करायेगी और लोग नहीं मानेगा। ठेकेदारी के लिए किसी के जीवन की हानि नहीं होने दी जाएगी। बठक में मौजूद निर्दलीय विधान पार्षद महेश्वर सिंह ने कहा कि नेपाल की तरफ सिकरहना की जो भी सहायक नदियों का पानी आता है, वह कहां जाएगा। अगर बांध बन जाएगा तो सालोभर बाढ़ की स्थिति बनी रहेगी। सिकरहना में जब नेपाली नदियों का पानी जाएगा तो बाऔध के बाहर के लोगों को बाढ़ से कभी निजात नहीं मिलेगा। सरकार इस पर डैम की व्यवस्था करे। पूर्वी चंपारण के दो सौ से ज्यादा गांव जो इस बांध प्रभावित होने वाले हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। पूर्व मंत्री व भाजपा नेता रामचंद्र सहनी ने कहा कि इस बांध के बनने से नदी के किनारे पर नदी के पानी का जलस्तर ऊंचा हो जाएगा। पानी का जलस्तर बढ़ने से उस क्षेत्र के जो भी बसावट है, वह बर्बाद हो जाएगा। घरों में पानी प्रवेश करेगा। केवल बालूआही जमीन रह जाएगी। फसल भी बर्बाद हो जाएगी। इससे नुकसान होगा और सैकड़ों गांव जलमग्न हो जाएगा।फायदा के बदले नुकसान होगा। इसलिए हमलोग चाहते हैं कि यह बांध नहीं बने।