राखी के धागे में सिमटा भाई-बहन का अटूट प्रेम, बिहारभर में हर्षोल्लास से मना रक्षाबंधन
पटना(दीपक/शालिनी)। बिहार में शुक्रवार को भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। सुबह होते ही शहरों से लेकर गांवों तक घर-आंगन में त्योहार की रौनक दिखाई देने लगी। कहीं बहनें पूजा की थाली सजाती नजर आईं तो कहीं भाइयों की कलाई रंग-बिरंगी राखियों से सजती दिखी। बहनों ने रोली-चंदन, अक्षत, मिठाई और राखी से सजी थाली लेकर भाइयों के माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी और कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना की।
सासाराम के कंपनी सराय मोहल्ले में भी रक्षाबंधन की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। बालक अद्वैत साह की कलाई पर उसकी बहन ईश्ना ने स्नेह और अपनत्व के साथ राखी बांधी। बहन ने भाई के माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी और मिठाई खिलाकर उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान अद्वैत के चेहरे पर भी खुशी साफ झलक रही थी। भाई ने भी बहन को उपहार देकर हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।

मुजफ्फरपुर जिले में भी सुबह से ही रक्षाबंधन को लेकर उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा। सड़कों से लेकर घर-आंगन तक भाई-बहन के इस पवित्र पर्व की गतिविधियां नजर आईं। दूर-दराज रहने वाली बहनें अपने मायके पहुंचीं तो कई भाई भी बहनों से राखी बंधवाने के लिए उनके घर पहुंचे। लंबे समय बाद परिवार के सदस्यों के एक साथ जुटने से घरों में हंसी-ठिठोली और पुरानी यादों का सिलसिला चलता रहा। कई घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए गए और भाई-बहनों ने साथ बैठकर पर्व की खुशियां साझा कीं। दोपहर बाद मौसम भी सुहाना हो गया। जिले के कई इलाकों में बारिश होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली।
सुपौल जिले में भी रक्षाबंधन का पर्व पारंपरिक उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही घरों में विशेष चहल-पहल रही। बहनों ने भाइयों की कलाई पर रंग-बिरंगी राखियां बांधीं, आरती उतारी और मिठाई खिलाकर उनकी दीर्घायु एवं खुशहाली की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर जीवन के हर सुख-दुख में साथ निभाने और उनकी रक्षा करने का संकल्प लिया।
पर्व को लेकर बाजारों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। राखी की दुकानों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ रही। तरह-तरह की रंगीन, आकर्षक और डिजाइनर राखियों ने बाजार की रौनक बढ़ा दी। बच्चों से लेकर युवतियों और महिलाओं तक अपनी पसंद की राखी खरीदने को लेकर उत्साहित नजर आए। मिठाई की दुकानों पर भी दिनभर चहल-पहल बनी रही।

भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित महत्वपूर्ण पर्व है। ‘रक्षा’ और ‘बंधन’ से बना यह शब्द अपने भीतर प्रेम, जिम्मेदारी और विश्वास की गहरी भावना समेटे हुए है। बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी दीर्घायु और खुशहाली की कामना करती है, जबकि भाई बहन की रक्षा और हर मुश्किल में उसका साथ निभाने का संकल्प लेता है। पौराणिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के स्नेह एवं रक्षा से जुड़े प्रसंग को भी रक्षाबंधन की भावना से जोड़ा जाता है।
बदलते समय के साथ त्योहार मनाने के तौर-तरीकों में बदलाव जरूर आया है, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट आज भी बरकरार है। रक्षाबंधन महज कलाई पर धागा बांधने की रस्म नहीं, बल्कि उन भावनाओं का नाम है जिन्हें शब्दों में बयां करना मुश्किल है। राखी के उस छोटे से धागे में बहन की मोहब्बत, दुआ, भरोसा और अपनापन समाया होता है। वहीं भाई भी नेग या उपहार देने के साथ बहन को यह भरोसा दिलाता है कि जिंदगी के अच्छे-बुरे हर दौर में वह उसके साथ खड़ा रहेगा।
सासाराम, मुजफ्फरपुर और सुपौल समेत बिहार के विभिन्न हिस्सों में मनाए गए रक्षाबंधन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जिंदगी कितनी भी बदल जाए, भाई-बहन के रिश्ते की मिठास और राखी के धागे में बंधा अपनापन कभी पुराना नहीं होता। यह पर्व रिश्तों को फिर से मजबूत करने, दूरियों को मिटाने और परिवार को प्रेम के सूत्र में बांधने का खूबसूरत अवसर बनकर सामने आया।












