-यूजीसी एक्ट की वापसी और आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग, सवर्ण समाज संघर्ष मोर्चा ने निकाला जन आक्रोश मार्च
-राज्यपाल के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन
-निर्दोष विद्यार्थियों, शिक्षकों और परिवारों की सुरक्षा की उठाई मांग
-एट्रोसिटी एक्ट समाप्त करने और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को विशेष सुविधाएं देने की मांग
-मांगें पूरी नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
मुजफ्फरपुर। यूजीसी एक्ट की पूर्ण वापसी, आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने और निर्दोष विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं परिवारों की सुरक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को सवर्ण समाज संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में जन आक्रोश मार्च निकाला गया। मार्च के बाद मोर्चा के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
मोर्चा के संयोजक रघुनंदन प्रसाद सिंह उर्फ अमर बाबू ने कहा कि शिक्षा, उच्च शिक्षा, आरक्षण और कानून व्यवस्था से जुड़े विषयों पर सरकार को न्यायपूर्ण, पारदर्शी एवं व्यावहारिक निर्णय लेना चाहिए। यूजीसी एक्ट से संबंधित विवादित प्रावधानों को पूरी तरह वापस लिया जाए। शिकायतों के मामलों में निष्पक्ष जांच, सुनवाई और अपील की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि निर्दोष विद्यार्थियों, शिक्षकों और उनके परिवारों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

ज्ञापन के माध्यम से मोर्चा ने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, शुल्क माफी, छात्रावास एवं उच्च शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। संगठन ने आरक्षण व्यवस्था को आर्थिक आधार पर लागू करने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने पर जोर दिया। इसके अलावा कानूनों के दुरुपयोग को रोकने, निष्पक्ष प्रारंभिक जांच और दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देने की मांग उठाई गई। मोर्चा ने एट्रोसिटी एक्ट समाप्त करने की भी मांग की। साथ ही अधिनियम समाप्त होने तक मुकदमा दर्ज करने से पहले निष्पक्ष प्रारंभिक जांच और झूठी शिकायत करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान करने की बात कही।
पूर्व जिला परिषद सदस्य शशि कुमार सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा और रोजगार में वास्तविक सहायता मिलनी चाहिए। छात्रवृत्ति, शुल्क माफी और उच्च शिक्षा की सुविधाएं सरल एवं पारदर्शी बनाई जाएं, ताकि गरीब परिवारों के मेधावी बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिले।
अजीत कश्यप ने कहा कि किसी भी कानून का उद्देश्य न्याय और सुरक्षा होना चाहिए। शिकायतकर्ता और आरोपित दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं, धीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए। प्रत्येक समाज के गरीब परिवारों को शिक्षा और रोजगार के समान अवसर मिलना ही सामाजिक न्याय का आधार है।
अमर बाबू ने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं होने पर मोर्चा का चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संगठन की मांगें किसी व्यक्ति या वर्ग के विरुद्ध नहीं, बल्कि समान अवसर, पारदर्शी व्यवस्था और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार एवं संसद से संबंधित मांगों को राष्ट्रपति और भारत सरकार तक अनुशंसा सहित भेजने तथा राज्य से जुड़ी मांगों पर बिहार सरकार को आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया।
मार्च एवं ज्ञापन सौंपने के दौरान सुधीर कुमार ओझा, विजय कुमार चौधरी, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अवधेश प्रसाद सिंह, गणेश प्रसाद सिंह, बिसंबर कुमार पप्पू, मनीष झा, श्रवण कुमार, बृजभूषण मिश्र, रंजन कुमार, रूपेश कुमार, हरेराम मिश्र, महंत मृत्युंजय दास, संजय कुमार सिंह, सुरेश कुमार, सुखेंद्र कुमार ठाकुर एवं मनोज श्रीवास्तव सहित अन्य लोग शामिल रहे।











