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मुशहरी जमीन फर्जीवाड़ा मामला: निलंबित सीओ महेंद्र शुक्ला से पूछताछ की सूचना, पुलिस की पुष्टि नहीं

-मुशहरी जमीन फर्जीवाड़ा मामला: निलंबित सीओ महेंद्र शुक्ला से पूछताछ की सूचना, पुलिस की पुष्टि नहीं

मुजफ्फरपुर। मुशहरी अंचल में जमीन के कथित फर्जी दाखिल-खारिज मामले में निलंबित अंचलाधिकारी (सीओ) महेंद्र कुमार शुक्ला को अहियापुर थाने में हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की सूचना सामने आई है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सेवानिवृत्त अवर सचिव विजय कुमार की 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन से जुड़े मामले में उनसे सवाल-जवाब कर रहे हैं। हालांकि, सीओ को हिरासत में लिए जाने की पुलिस की ओर से अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
विजय कुमार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार से सेवानिवृत्त अवर सचिव हैं। उनकी शिकायत के अनुसार, अहियापुर थाना क्षेत्र के शहबाजपुर में उनके पिता जितेंद्र प्रसाद शाही और दादा योगेंद्र प्रसाद शाही के नाम दर्ज खाता संख्या 53 और खेसरा संख्या 403 की 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपने नाम कराने की कोशिश की गई।
शिकायत में हाजीपुर के सेलमपुर कुचुनदास कोर्ट निवासी कृष्णनंदन पासवान पर निबंधन कार्यालय के दस्तावेज संख्या 10612, दिनांक 6 जून 1986 के आधार पर जमीन का खरीदार होने का दावा करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच में उक्त दस्तावेज संख्या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज मिली।


इस मामले में बेलसंड विधायक अमित कुमार रानू, उनके भाई अभिनव कुमार, तत्कालीन सीओ महेंद्र शुक्ला, राजस्व अधिकारी करुण कुमार और अंचल के कर्मचारियों समेत आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोप है कि कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन का दाखिल-खारिज कराया गया। इसके बाद जमीन अभिनव कुमार, अरविंद कुमार मेहता और तुषार सिंह के नाम दर्ज कराने तथा दोबारा दाखिल-खारिज कराने की प्रक्रिया अपनाई गई। मामले में जमीन के दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
महेंद्र शुक्ला पर एक अन्य दाखिल-खारिज मामले में मृत महिला मालती देवी के नाम से दर्ज आपत्ति स्वीकार करने और आवेदन को 140 दिनों तक लंबित रखने का आरोप भी लगा था। जिलाधिकारी कुमार गौरव की जांच रिपोर्ट के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया था। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय सारण प्रमंडल के आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है।
जमीन विवाद में कथित फर्जी केवाला, दाखिल-खारिज, ऑनलाइन परिमार्जन प्लस और भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र (एलपीसी) से संबंधित अनियमितताओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस जांच में दस्तावेजों की प्रामाणिकता, राजस्व रिकॉर्ड में हुए बदलाव और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल, सीओ को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।