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मुजफ्फरपुर में बाल श्रम के खिलाफ सख्त कार्रवाई, 9 बच्चे मुक्त, कई प्रतिष्ठानों पर केस

–मुजफ्फरपुर में बाल श्रम के खिलाफ सख्त कार्रवाई, 9 बच्चे मुक्त, कई प्रतिष्ठानों पर केस

मुजफ्फरपुर। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिले में बाल श्रम के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। श्रम अधीक्षक अजय कुमार के नेतृत्व में गठित धावा दल ने मुजफ्फरपुर नगर निगम क्षेत्र सहित सदर अनुमंडल, कांटी, मरवन, कुढ़नी और मीनापुर में तीन दिनों तक सघन जांच अभियान चलाया।
अभियान के दौरान विभिन्न दुकानों और होटलों से कुल 9 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया। सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर निर्देशानुसार बाल गृह में रखा गया है।
श्रम विभाग ने स्पष्ट किया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत बाल श्रमिकों को काम पर रखना गैरकानूनी है। दोषी नियोजकों के खिलाफ संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। कानून के तहत ऐसे मामलों में ₹20,000 से ₹50,000 तक जुर्माना और दो साल तक की सजा का प्रावधान है।


इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु सरकार, 1996) के अनुसार प्रत्येक बाल श्रमिक के लिए नियोजक से ₹20,000 की अतिरिक्त राशि वसूल कर जिला बाल श्रमिक पुनर्वास सह कल्याण कोष में जमा कराई जाएगी। राशि जमा नहीं करने पर संबंधित नियोजक के खिलाफ सर्टिफिकेट केस या नीलामी वाद दायर किया जाएगा।
इस अभियान में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी पूजा कुमारी, प्रकाश कुमार, रमेश रंजन प्रसाद, सूर्यकांत कुमार, डॉ. रश्मि राज, शशांक शेखर, रंजीत मिश्रा, तान्या श्री, संजय कुमार, मोहम्मद अली, अवंत कुमार समेत विभिन्न प्रखंडों के पदाधिकारी और स्थानीय थाना पुलिस की टीम शामिल रही।
धावा दल ने सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच करते हुए नियोजकों से यह शपथ पत्र भी भरवाया कि वे किसी भी बाल श्रमिक को नियोजित नहीं करेंगे। श्रम अधीक्षक ने बताया कि यह अभियान अब नियमित रूप से हर सप्ताह चलाया जाएगा और पूरे जिले में सख्ती से लागू किया जाएगा।