-मानसून के साथ पटना में बढ़ा डेंगू का खतरा, जुलाई के पहले पांच दिनों में मिले 22 नए मरीज
पटना। राजधानी पटना में मानसून की दस्तक के साथ ही डेंगू का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। जुलाई के पहले पांच दिनों में 22 नए डेंगू मरीज सामने आए हैं, जबकि 30 जून तक पूरे जिले में 23 मामले ही दर्ज किए गए थे। महज कुछ दिनों में मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी होकर 45 पहुंच गई है।
जिला संक्रामक रोग नियंत्रण कार्यक्रम कार्यालय के अनुसार, 5 जुलाई तक जिले में कुल 45 डेंगू मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के साथ संक्रमण की यह शुरुआती बढ़ोतरी आने वाले महीनों के लिए चेतावनी है। बिहार में डेंगू का पीक सीजन सामान्यतः सितंबर और अक्टूबर माना जाता है, लेकिन जुलाई में ही मामलों का तेजी से बढ़ना चिंता का विषय है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इस वर्ष मिले करीब आधे मरीजों की पहचान निजी लैब में हुई है, जबकि शेष मामलों की पुष्टि पीएमसीएच, एनएमसीएच और आईजीआईएमएस में जांच के बाद की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर बारिश के बाद जमा साफ पानी में तेजी से पनपते हैं। खाली प्लॉट, निर्माणाधीन भवन, कूलर, गमले, फ्रिज की ट्रे तथा खुले बर्तनों में जमा पानी इनके प्रजनन के प्रमुख स्थान बन जाते हैं। इसे देखते हुए कंकड़बाग, बांकीपुर, नूतन राजधानी और पटना सिटी समेत कई इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार सर्विलांस और लार्वा जांच अभियान चला रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सप्ताह में एक दिन और एक घंटे सफाई अभियान चलाने की अपील की है। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलने, फ्रिज की वेस्ट वाटर ट्रे साफ रखने, छत और बालकनी में पड़े पुराने टायर, टूटे बर्तन व कबाड़ हटाने तथा गमलों की प्लेटों में पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों ने कहा है कि थोड़ी-सी सावधानी डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से बचाव में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि तेज बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द या त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें।












