Advertisement

‘मन की बात’ में बिहार के नवाचारों को मिली पहचान, पीएम मोदी की सराहना से बढ़ा उत्साह

-‘मन की बात’ में बिहार के नवाचारों को मिली पहचान, पीएम मोदी की सराहना से बढ़ा उत्साह

दीपक कुमार तिवारी। पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बिहार के कई नवाचारों, सामाजिक पहलों और स्थानीय उद्यमों का जिक्र होने के बाद इन प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिली है। प्रधानमंत्री की सराहना से न केवल संबंधित लोगों का उत्साह बढ़ा है, बल्कि उनके कार्यों को भी नई गति मिली है।
पश्चिम चंपारण के मझौलिया प्रखंड स्थित रतनमाला गांव के प्रमोद कुमार इसका प्रमुख उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री ने 2021 में ‘मन की बात’ के दौरान उनके एलईडी बल्ब निर्माण कार्य की सराहना करते हुए इसे ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान से जोड़ा था। कोरोना काल में दिल्ली से लौटने के बाद प्रमोद ने अपने गांव में एलईडी बल्ब बनाना शुरू किया। शुरुआती दौर में वे प्रतिदिन 800 से 900 बल्ब तैयार करते थे, जिससे उनकी मासिक आय 35 से 40 हजार रुपये थी। आज उनका उत्पादन बढ़कर 1300 से 1400 बल्ब प्रतिदिन हो गया है और उनकी मासिक आय 55 से 60 हजार रुपये तक पहुंच गई है। साथ ही उन्होंने स्थानीय युवाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया है।
हाल ही में 26 जुलाई 2026 को प्रसारित ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने सीतामढ़ी के बाजपट्टी में संचालित ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल की भी सराहना की। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक कचरे से टेबल और बेंच तैयार करने की इस पहल को राष्ट्रीय मंच मिलने से जिले में खुशी का माहौल है। जिलाधिकारी रिची पांडेय ने कहा कि यह सम्मान स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के क्षेत्र में किए जा रहे सामूहिक प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। उन्होंने बताया कि रुन्नीसैदपुर में जल्द दो नई इकाइयों में उत्पादन शुरू होगा, जबकि नानपुर के प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र में भी एक नई इकाई स्थापित करने की योजना है।
मुजफ्फरपुर की ‘सोलर दीदी’ देवकी देवी का उल्लेख भी प्रधानमंत्री ने 31 अगस्त 2025 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किया था।

रतनपुरा ककराचक गांव की देवकी देवी ने सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली अपनाकर महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। वर्तमान में वह करीब 40 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई सोलर पंप से कर रही हैं और इससे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा उनके कार्य की सराहना उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।
इसी तरह 29 अगस्त 2021 के ‘मन की बात’ में मधुबनी जिले के झंझारपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र, सुखेत की अभिनव पहल का भी जिक्र किया गया था। इस मॉडल के तहत किसानों से गोबर और जैविक कचरा लेकर जैविक खाद तैयार की जाती थी और बदले में उन्हें रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाता था। वर्तमान में सिलेंडर के स्थान पर किसानों को आर्थिक भुगतान किया जा रहा है, जिससे स्वच्छता और जैविक खेती दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।
प्रधानमंत्री ने 30 अगस्त 2020 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पश्चिम चंपारण के थारू समाज की पारंपरिक ‘बरना पर्व’ परंपरा का भी उल्लेख किया था। इस पर्व के दौरान 214 गांवों में लोग 60 घंटे तक घरों से बाहर नहीं निकलते और प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा इस परंपरा का जिक्र किए जाने के बाद इसके प्रति लोगों में जागरूकता और सम्मान दोनों बढ़े हैं।
बिहार के इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि स्थानीय नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता से जुड़े प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में उल्लेख के बाद इन पहलों को नई ऊर्जा मिलने के साथ-साथ अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिल रही है।