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भीषण गर्मी, अल-नीनो और बिहार के सामने बढ़ता मौसम संकट

-भीषण गर्मी, अल-नीनो और बिहार के सामने बढ़ता मौसम संकट

आलेख: दीपक कुमार तिवारी।

बिहार इन दिनों भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। राज्य के कई जिलों में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ती उमस ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। शहर से लेकर गांव तक लोग गर्मी की परेशानी झेल रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। राज्य में लू का प्रभाव लंबे समय तक बना रहने की संभावना जताई जा रही है।

मौसम में हो रहे बदलाव केवल तापमान तक सीमित नहीं हैं। वैज्ञानिक लगातार प्रशांत महासागर के विषुवतीय क्षेत्र में बढ़ रहे समुद्री तापमान पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार “अल-नीनो” और संभावित “सुपर अल-नीनो” की स्थिति वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। इसका असर भारत के मानसून और विशेष रूप से बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्यों पर भी पड़ सकता है।

अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। इसका असर समुद्री हवाओं और मानसूनी प्रणाली पर पड़ता है। जब समुद्र से आने वाली नमी वाली हवाएं कमजोर होती हैं तो वर्षा की मात्रा प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि मौसम विशेषज्ञ कम बारिश और सूखे जैसे हालात की आशंका जता रहे हैं।

बिहार की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खेती पर आधारित है। मानसून यदि कमजोर पड़ता है तो धान, मक्का और अन्य फसलों की खेती प्रभावित हो सकती है। कम बारिश का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जलस्तर, पेयजल संकट और ग्रामीण रोजगार पर भी पड़ता है। जलाशयों में पानी की कमी और भूजल स्तर में गिरावट जैसी समस्याएं भी गंभीर रूप ले सकती हैं।

भीषण गर्मी का असर स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। लू, डिहाइड्रेशन, थकान और गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ने लगते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों पर इसका प्रभाव अधिक पड़ता है। विशेषज्ञ लगातार लोगों को सावधानी बरतने, पर्याप्त पानी पीने और दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की सलाह दे रहे हैं।

वर्तमान समय केवल मौसम की चुनौती नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की जरूरत को भी सामने ला रहा है। जल संरक्षण, वृक्षारोपण, ऊर्जा के संतुलित उपयोग और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

बिहार आज भीषण गर्मी और संभावित कम वर्षा के दोहरे संकट के सामने खड़ा है। आने वाले महीने राज्य के मौसम, खेती और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। ऐसे में वैज्ञानिक चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए समय रहते तैयारी करना ही सबसे बड़ा समाधान होगा।