-भारतीय बाणिज्य महादूत ने किया जनकपुरधाम स्थित मैथिली विकास कोष भवन का अवलोकन, कहा– “भारत-नेपाल की साझा सांस्कृतिक धरोहर है मिथिला”
जनकपुरधाम। मिश्री लाल मधुकर।
भारतीय बाणिज्य महादूतावास वीरगंज के बाणिज्य महादूत देवी सहाय मीणा ने सोमवार को जनकपुरधाम स्थित ज्ञानकूप के समीप निर्मित मैथिली विकास कोष भवन का अवलोकन किया। इस अवसर पर मैथिली विकास कोष के अध्यक्ष जीव नाथ चौधरी ने उन्हें अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया।
अवलोकन के दौरान बाणिज्य महादूत देवी सहाय मीणा ने मिथिला की पारंपरिक संस्कृति को सहेजने वाले अन्न भंडारण के कोठी, फूस के घर, विभिन्न जातियों के पारंपरिक औजार, मिथिला पेंटिंग, वाद्य यंत्र, पारंपरिक पोशाक और कलाकृतियों को देखकर गहरी रुचि व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मैथिली संस्कृति भारत और नेपाल दोनों देशों की संयुक्त सांस्कृतिक विरासत है, जिसे सहेजना और आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व है।

उन्होंने भवन में बने पुस्तकालय का भी निरीक्षण किया, जहाँ सभी भाषाओं की 10,000 से अधिक पुस्तकें संग्रहित हैं। जीवनाथ चौधरी ने उन्हें कई नामचीन साहित्यिक कृतियों से परिचित कराया, जिन्हें देखकर बाणिज्य महादूत अत्यंत प्रसन्न हुए।
देवी सहाय मीणा ने कहा कि “मैथिली विकास कोष भवन न केवल सांस्कृतिक केंद्र है, बल्कि भारत-नेपाल के बीच भाषाई, साहित्यिक और सांस्कृतिक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है।”
बताया जाता है कि 6 करोड़ की लागत से निर्मित चार मंजिला मैथिली विकास कोष भवन नेपाल और भारत की मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का सबसे बड़ा प्रतीक है। यहाँ समय-समय पर कवि गोष्ठी, सेमिनार, नाट्य महोत्सव और साहित्यिक आयोजन होते रहते हैं, जो मैथिली भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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