-फ़्रीडम स्टडीज़ रिसर्च सेन्टर का ऑनलाइन बोधमाला व्याख्यान से हुआ उद्घाटन
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-विश्वविद्यालयों में स्वतंत्रता अध्ययन विभाग की स्थापना की जाये: डॉ. जावैद अब्दुल्लाह
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– गाँधी को अपना गुरु मानते हैं प्रो. योहान गाल्तुंग
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सम्वाददाता। दरभंगा(बिहार)।
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय सम्बन्धित मालवीय सेन्टर फ़ॉर पीस रिसर्च (एमसीपीआर) के विभागाध्यक्ष प्रो मनोज कुमार मिश्र की अध्यक्षता में फ़्रीडम स्टडीज़ रिसर्च सेन्टर (एफ़एसआरसी, दरभंगा) ऑनलाइन बोधमाला व्याख्यान सत्र के ज़रिये शुक्रवार 7 जुलाई की संध्या में हुआ सफलतापुर्वक आरम्भ हुआ। ‘योहान गाल्तुंग और शान्ति की अवधारणा’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में (एफ़एसआरसी) के संस्थापक, लेखक व शान्ति दार्शनिक डॉ. जावैद अब्दुल्लाह ने बोधमाला अंक-1 का व्याख्यान प्रस्तुत किया। व्याख्यान में वक्ता ने कहा कि शान्ति अध्ययन को दुनिया भर में स्थापित करने में योहान गाल्तुंग (नॉर्वे) का योगदान अतुल्यनीय है। केनिथ बोल्डिंग ने उनके काम की तुलना पिकासो से की है। वक्ता ने अपने एक घन्टे के व्याख्यान में विस्तार से शान्ति के नकारात्मक और सकारात्मक का वर्णन किया और बताया कि महात्मा गाँधी को अपना गुरु माननेवाले योहान जब पैदा हुये (24 अक्तूबर 1930) तब गाँधी आग़ाखां पैलेस में क़ैद थे। वहीं जब गाल्तुंग ने गाँधी पर अपनी पहली पुस्तक ‘गाँधी पॉलिटिकल एथिक्स’ लिखी, तब वे स्वयं नाजियों के कंसेनट्रेशन कैंप में क़ैद थे। इसके लक्ष्य के विषय में चर्चा करते हुये कहा गया विश्वविद्यालयों में स्वतंत्रता अध्ययन विभाग की स्थापना की जाये।

ज्ञात हो कि योहान विन्सेंट गालतुंग शान्ति अध्ययन के जनक माने जाते हैं; वे एक समाजशास्त्री और राजनीतिक वैज्ञानिक होने के साथ-साथ गणितज्ञ भी हैं और वे प्रो. सुगाता दास गुप्ता के बुलाने पर 1969 के बसन्त ऋतू में बनारस सर्वसेवा संघ राजघाट भी आये थे और वहाँ जय प्रकाश नारायण द्वारा स्थापित इंस्टिट्यूट ऑफ़ गांधियन स्टडीज़ में पधारे थे। कार्यक्रम की संचालिका साहेबगंज कॉलेज दुमका की सहायक प्राध्यापिका डॉ. मेघा कुमारी थीं।












