-जन समस्याओं के समाधान को लेकर सरकार सख्त, 30 दिन में निपटारा नहीं होने पर होगी कार्रवाई
पटना। बिहार सरकार आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर गंभीर नजर आ रही है। इसी कड़ी में सरकार ने सहयोग शिविर अभियान को प्रभावी बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। सरकार का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है तो आम लोगों की समस्याओं का तेजी से समाधान होगा और समाज में शांति व बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित होगी।
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र ने सहयोग शिविर के संचालन को लेकर अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में सभी विभागों के सचिवों, प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजा गया है।
सरकार ने कहा है कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे की रफ्तार काफी धीमी है। ऐसे में सभी जिलों के समाहर्ता, अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता और अंचल अधिकारियों को अपने-अपने न्यायालयों में लंबित मामलों की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। जिन पंचायतों में सहयोग शिविर प्रस्तावित हैं, वहां लंबित मामलों का निष्पादन शिविर की तिथि से पहले करने को कहा गया है, ताकि संबंधित पक्षों को समय पर जानकारी दी जा सके।

नई गाइडलाइन के अनुसार सहयोग शिविर में जिले के सांसद, विधायक और जिला व प्रखंड बीस सूत्री समिति के सदस्यों को भी आमंत्रित किया जाएगा। जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि आवेदनों का निपटारा पारदर्शी और सही तरीके से हो। बिना अपेक्षित कार्रवाई के मामलों के निष्पादन पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि जिलाधिकारी गोपनीय शाखा के माध्यम से कुछ आवेदकों से सीधे संपर्क कर यह फीडबैक लें कि उनकी शिकायतों का सही समाधान हुआ या नहीं। शिकायत मिलने पर मामले की समीक्षा कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने साफ किया है कि आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं होने पर संबंधित प्रखंड स्तरीय अधिकारी के खिलाफ निलंबन और अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिम्मेदार कर्मियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। सरकार के इस कदम को प्रशासनिक जवाबदेही और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है।












