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चंपारण : वाटर पार्क के लिए चिन्हित जमीन पर विवाद गहराया, संघर्ष समिति ने सांसद पर लगाए कानून अपने हाथ में लेने का आरोप

-चंपारण : वाटर पार्क के लिए चिन्हित जमीन पर विवाद गहराया, संघर्ष समिति ने सांसद पर लगाए कानून अपने हाथ में लेने का आरोप

मोतिहारी, राजन द्विवेदी।

पीपरा कोठी में वाटर पार्क के लिए चिन्हित की गई भूमि को लेकर विवाद बढ़ गया है। हाल ही में कुछ ग्रामीणों द्वारा उक्त जमीन पर जबरन जुताई किए जाने के बाद ‘पिपराकोटी झील बचाओ संघर्ष समिति’ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मामले पर अपना पक्ष रखा है।

समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता चुन्नू कुमार ने कहा कि मौजा पीपरा कोठी, थाना संख्या 156, खेसरा नंबर 507 की जमीन हाल-सर्वे खतियान में गैर-मजरूआ के रूप में दर्ज है। इसका न तो किसी के नाम बंदोबस्त है और न ही पट्टा निर्गत हुआ है।

-1931 से सरकारी जमीन होने का दावा

विज्ञप्ति के अनुसार 1931-32 में जमींदारी उन्मूलन के बाद किसी भी व्यक्ति ने इस जमीन को लेकर अंचल में रिटर्न दाखिल नहीं किया। लिहाजा यह जमीन बिहार सरकार में समाहित हो गई। समिति ने स्पष्ट किया कि यह पीपरा कोठी की झील है, मोतिहारी झील इससे 10 किमी दूर है और उसका विकास अलग से हो रहा है।

समिति ने बताया कि गलत तरीके से की गई जमाबंदी को अपर समाहर्ता ने जांच के बाद रद्द कर दिया था, क्योंकि कोई स्वत्व संबंधी कागज प्रस्तुत नहीं किया गया। प्रभावित पक्ष चाहे तो जिला समाहर्ता या उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।

-सांसद पर उकसाने का आरोप

समिति ने सांसद सुधाकर सिंह द्वारा जारी विज्ञप्ति को “वास्तविक स्थिति का विवरण नहीं” बताया। आरोप लगाया कि जिस जमीन पर टेंडर के बाद एक बड़ी कंपनी द्वारा काम चल रहा था, वहां सांसद स्वयं ट्रैक्टर लेकर पहुंच गए और जुताई करने लगे। साथ ही लोगों को उकसाया गया। समिति ने इसे “कानून को अपने हाथ में लेना” और “शोभनीय नहीं” करार दिया।

विज्ञप्ति में कहा गया कि पर्यटन विभाग ने सीताकुंड मेला और पीपरा कोठी झील के विकास के लिए टेंडर किया है। ऐसे में कानून का रास्ता अपनाकर सिविल वकील से सलाह लेना उचित होगा।

-पप्पू यादव के भ्रमण का भी जिक्र

समिति ने कहा कि माननीय पप्पू यादव भी क्षेत्र में आए थे, लेकिन लोगों के कहने पर भी वे कार्यस्थल पर नहीं गए। उन्होंने अलग से सभा कर हाईकोर्ट जाने की बात कही थी।

फिलहाल प्रशासन द्वारा चिन्हित इस जमीन पर वाटर पार्क निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद सामने आ गए हैं।