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खंडहर में तब्दील हुआ प्रतापपुर का ऐतिहासिक राजगढ़ किला, अब कचरा फेंकने की जगह बना

-खंडहर में तब्दील हुआ प्रतापपुर का ऐतिहासिक राजगढ़ किला, अब कचरा फेंकने की जगह बना

-बदबू और गंदगी से आसपास के लोग परेशान, संरक्षण नहीं होने से मिट रही विरासत

अमित कुमार सिंह, चतरा।

झारखंड के चतरा जिले के प्रतापपुर स्थित ऐतिहासिक राजगढ़ किला आज उपेक्षा और बदहाली का शिकार बन चुका है। कभी क्षेत्र की शान और गौरव माने जाने वाला यह ऐतिहासिक किला अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। हालत यह है कि किले के आसपास खुलेआम कचरा फेंका जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में गंदगी और दुर्गंध फैल गई है। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि बदबू के कारण उनका घरों में रहना मुश्किल हो गया है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि राजगढ़ किला कभी प्रतापपुर की ऐतिहासिक पहचान हुआ करता था। दूर-दूर से लोग इस धरोहर को देखने पहुंचते थे। गांव के बुजुर्ग आज भी किले से जुड़ी कई ऐतिहासिक कहानियां और लोककथाएं सुनाते हैं। लेकिन संरक्षण के अभाव में इसकी दीवारें टूटने लगीं और अब यह पूरी तरह वीरान नजर आने लगा है।

ग्रामीणों के अनुसार, किले के आसपास नियमित साफ-सफाई नहीं होने से यह स्थान धीरे-धीरे कचरा फेंकने का अड्डा बन गया है। यहां घरों का कूड़ा, प्लास्टिक और अन्य गंदगी फेंकी जा रही है। बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। सड़ांध और गंदगी के कारण लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी होती है। कई बार स्थानीय लोगों ने प्रशासन से शिकायत भी की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और पुरातत्व विभाग गंभीर पहल करे तो इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। किले की साफ-सफाई, घेराबंदी और संरक्षण होने से यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

स्थानीय युवाओं ने भी किले के संरक्षण की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सरकार को इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और विरासत को जान सकें। ग्रामीणों ने किले के आसपास कचरा फेंकने पर रोक लगाने और नियमित सफाई अभियान चलाने की मांग की है।

इतिहास की गवाही देने वाला राजगढ़ किला आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यदि समय रहते इसके संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह मिट सकती है।