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इस समय करें गेहूं की खेती, मिलेगा जबरदस्त उत्पादन; बेहतर पैदावार के लिए इन बातों का रखना होगा ध्यान

-इस समय करें गेहूं की खेती, मिलेगा जबरदस्त उत्पादन; बेहतर पैदावार के लिए इन बातों का रखना होगा ध्यान

पुपरी।संवाददाता।

रबी फसलों की निर्भरता पूरी तरह मौसम पर आधारित है। मौसम यदि अनुकूल रहा तो पैदावार अच्छी होगी,यदि मौसम साथ नही दिया तो उपज प्रभावित होगी। इस बार का मौसम रबी फसलों खासकर गेहूं के लिए उपयुक्त नहीं कहा जा सकता है।

दिसंबर में ठंड पड़नी चाहिए थी तो जेठ-बैशाख जैसी गर्मी रही। जनवरी के शुरुआत से ठंड बढ़ी है। इससे किसान थोड़े खुश दिख रहे हैं। वैसे गेहूं की बेहतर पैदावार के लिए शीतलहर चलना ज्यादा अच्छा माना जाता है।
कृषि विज्ञान केन्द्र, पुपरी के शस्य विज्ञानी डा सच्चिदानंद प्रसाद कहते हैं कि रबी फसलों के लिए शुरूआत में समय संतोषजनक नहीं रहा। मौसम की प्रतिकूलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर में शीतलहर नहीं चला। नए वर्ष की शुरुआत से शीतलहर और कुहासा देखा जा रहा है।

हालांकि शीतलहर 7 डिग्री से नीचे तापमान रहने पर ही माना जाता है। बावजूद किसानों की उम्मीदें गेहूं की पैदावार को लेकर बढ़ने लगी है। इसके लिए जरूरी है कि समय-समय पर उसकी देखरेख होती रही। गेहूं के लिए समय से पटवन की जरूरी है।

समय से तीन बार सिंचाई की आवश्यकता:

गत साल बारिश कम होने की वजह से गेहूं की फसल में समय से तीन बार सिंचाई की आवश्यकता है। जिस किसान ने 1-15 नवंबर तक गेहूं की बुवाई की है, उसमें अभी दूसरी सिंचाई की जरूरी है। पहली सिंचाई 21-25 दिनों के बीच कर लेनी चाहिए थी।

अगली सिंचाई में देरी होगी तो उत्पादन प्रभावित होगा। बताया कि नवंबर माह के आखिरी सप्ताह से लेकर जनवरी के अंतिम सप्ताह तक शीतलहर का समय रहता है। शीतलहर तभी मानी जाती है जब पारा 7 डिग्री से नीचे हो।

खरपतवार नियंत्रण के साथ उर्वरक भी जरूरी:

विज्ञानी ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए मौसम अभी अनुकूल है। ऐसी स्थिति में सिंचाई के बाद उर्वरक के रूप में प्रति एकड़ 40 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग करना चाहिए। दानेदार यूरिया की जगह नैनो यूरिया का भी प्रयोग किया जा सकता है।
इसमें 4 मिली नैनो यूरिया और 2 मिली डीएपी को प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर प्रयोग किया जा सकता है। खरपतवार और बथुआ नियंत्रण के लिए गेहूं में चौड़ी पत्ती के लिए 2-4 डी एमाइन साल्ट 58 प्रतिशत को 400 मिली. प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए। सभी प्रकार के खरपतवार नियंत्रण के लिए सल्फोसलफ्यूरान 16 ग्राम अथवा क्लोडिनोफाल पोप्रामिल 160 ग्राम के साथ 8 ग्राम मेटसलफ्यूरान प्रति एकड़ की दर से छिड़काव किया जा सकता है।

कहते है किसान:

बेलमोहन गांव के किसान अमरेंद्र पांडेय बताते हैं कि अभी गेहूं के लिए मौसम अनुकूल है। इस बार खाद की किल्लत नही हुई है। आगे मौसम ठीक रहा तो फसल अच्छी होगी। रामपुर गांव के किसान विजय यादव बताते हैं कि पटवन के लिए परेशानी हुई है।

निजी पंपसेट से सिंचाई करने पर 200 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से खर्च पड़ रहा है। निजी बोरिंग के समीप विद्युतीकरण नही होने से यह समस्या है। विक्रमपुर के किसान दिलीप महतो बताते है कि खाद की किल्लत इस बार नही हुई है। सभी खाद आसानी से मिल रहा है। सिर्फ खरपतवार परेशान कर रखा है।

इसके लिए दवा की खरीदारी और छिड़काव करनी पड़ी है। गंगापट्टी के किसान नरेश राउत बताते है कि थोड़ी विलंब से खेती हुई। बारिश नही होने के कारण पटवन कर गेहूं की बुवाई करनी पड़ी। खाद की समस्या नही है। सिर्फ खरपतवार और सिंचाई के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
देर से सर्दी शुरू होने के बावजूद गेहूं का आच्छादन संतोषजनक है। अब तक करीब 4000 हेक्टेयर में गेहूं का आच्छादन हो चुका है। जबकि लक्ष्य 4065.5 हेक्टेयर का था। बताया कि प्रखंड में उर्वरक की कोई किल्लत नही रही है। किसानों को आसानी से उर्वरक मिल रहा है। सबकुछ ठीक रहा तो गेहूं की अच्छी पैदावार होगी।

अवधेश चौधरी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, पुपरी

गेहूं की फसल के लिए अभी अनुकूल है मौसम
इस मौसम में सिंचाई के बाद प्रति एकड़ 40 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग करना चाहिए।
ध्यान रहे कि दानेदार यूरिया की जगह पर नैनो यूरिया इस्तेमाल करें।
प्रतिलीटर के हिसाब से 4 मिली नैनो यूरिया और 2 मिली डीएपी का मिश्रण बनाकर फसल में डालें।
खरपतवार और बथुआ नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों की राय लें।
इस मौसम में खेत में काम करते समय स्वयं को भी ठंड-शीतलहर से बचाएं।