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आर.डी.एस. कॉलेज में भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, चरित्र निर्माण और मातृभाषा के महत्व पर जोर

-आर.डी.एस. कॉलेज में भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, चरित्र निर्माण और मातृभाषा के महत्व पर जोर

मुजफ्फरपुर: भारतीय शिक्षा दिवस के अवसर पर राम दयालु सिंह (आर.डी.एस.) कॉलेज, मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण सभागार में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा : शिक्षा, संस्कृति एवं समकालीन परिप्रेक्ष्य’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज की आईक्यूएसी (IQAC) एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, उत्तर बिहार प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। संगोष्ठी में शिक्षा, संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक के रूप में उपस्थित बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय ने भारतीय शिक्षा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति का समग्र विकास और चरित्र निर्माण है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक में प्रगति के साथ भारतीय संस्कृति, मूल्यों और अनुशासन को भी समान महत्व देना आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के निर्माण में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के योगदान की भी सराहना की।
मुख्य वक्ता के रूप में त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय, अगरतल्ला के साहित्य संकाय के अधिष्ठाता एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय भाषा मंच के सह-संयोजक प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार मिश्र ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था को उसकी मूल पहचान लौटाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था ने भारतीय ज्ञान परंपरा को कमजोर किया, जबकि बिहार नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात ज्ञान केंद्रों की भूमि रहा है। उन्होंने युवाओं से अपनी मातृभाषा, मातृभूमि और भारतीय चिंतन परंपरा से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि “मां, मातृभाषा और मातृभूमि का कोई विकल्प नहीं है।”


विशिष्ट वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के महाविद्यालय निरीक्षक (कला एवं वाणिज्य) प्रो. (डॉ.) राजीव कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता समन्वय की भावना है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा शास्त्र और लोक दोनों के संतुलन पर आधारित है तथा यक्ष-युधिष्ठिर संवाद का उदाहरण देते हुए सम्यक श्रवण और वास्तविक बोध को सच्चा ज्ञान बताया।
इससे पूर्व आर.डी.एस. कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) शशि भूषण कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े सार्थक शैक्षणिक आयोजन लगातार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य छात्रों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, परंपरा और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. भगवान कुमार (गणित विभाग) और पंकज कुमार तिवारी ने किया, जबकि अंत में डॉ. रजनी कांत पांडेय ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, बुद्धिजीवी, शोधार्थी और विद्यार्थियों ने भाग लिया।