-सम्राट कैबिनेट विस्तार: कई दिग्गजों का कटा पत्ता, नए चेहरों को मिला मौका
पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित ऐतिहासिक Gandhi Maidan में गुरुवार, 7 मई को मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार हो गया। प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और रक्षा मंत्री Rajnath Singh की मौजूदगी में राज्यपाल ने 32 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
सम्राट चौधरी के इस कैबिनेट विस्तार में एनडीए के सभी सहयोगी दलों को साधने की कोशिश साफ दिखाई दी। मंत्रिमंडल में जहां कई पुराने और अनुभवी नेताओं को दोबारा मौका मिला, वहीं कई नए चेहरे पहली बार मंत्री बने। हालांकि, जदयू और भाजपा के कई बड़े नेताओं को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बीजेपी के कई चर्चित चेहरे बाहर
कैबिनेट विस्तार से पहले भाजपा की ओर से कई नामों की चर्चा जोरों पर थी, लेकिन अंतिम सूची में उन्हें जगह नहीं मिल सकी।
Maithili Thakur का नाम महिला चेहरों में प्रमुखता से चल रहा था। दरभंगा जिले की अलीनगर सीट से जीत दर्ज करने वाली मैथिली ठाकुर को मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री Mangal Pandey को भी इस बार कैबिनेट से बाहर रखा गया। नीतीश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके मंगल पांडेय का नाम लगातार चर्चा में था, ऐसे में उनका नाम सूची से गायब होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
इसी तरह पूर्व मंत्री Neeraj Singh Bablu भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना सके। माना जा रहा है कि जातीय संतुलन और प्रदर्शन के समीकरण उनके खिलाफ चले गए। सम्राट कैबिनेट में राजपूत समाज से पहले ही चार नेताओं को प्रतिनिधित्व मिल चुका है।
भाजपा के कद्दावर नेता Jibesh Kumar भी इस बार मंत्री बनने से चूक गए। वे पहले भी मंत्री रह चुके हैं और इस बार भी उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी।
जदयू के युवा चेहरों को करना होगा इंतजार
जदयू में भी कई युवा चेहरों को लेकर चर्चाएं थीं। खासकर Nishant Kumar की टीम से जुड़े नेताओं के मंत्री बनने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन इनमें से कई नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो सके।
बाहुबली नेता Anand Mohan के बेटे और विधायक Chetan Anand का नाम मंत्री पद के लिए काफी चर्चा में था, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला।
गायघाट से विधायक और सांसद Veena Devi की बेटी Komal Singh भी मंत्री बनने की दौड़ में थीं, पर उन्हें अभी इंतजार करना होगा।
इसके अलावा इस्लामपुर विधायक Rohel Ranjan और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष Sadanand Singh के बेटे Shubhendu Mukesh भी मंत्री बनने से चूक गए।
जदयू से इन नेताओं को मिला मौका
जदयू की ओर से सबसे चर्चित नाम Nishant Kumar का रहा, जिन्हें पहली बार मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा विधायक Shweta Gupta और Bulo Mandal पर भी नेतृत्व ने भरोसा जताया है।
वहीं अनुभवी नेताओं में Shravan Kumar, Madan Sahni, Leshi Singh, Bhagwan Singh Kushwaha, Damodar Rawat, Sunil Kumar, Sheela Mandal, Ratnesh Sada, Jama Khan और Ashok Choudhary को एक बार फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल मंत्रियों की संख्या बढ़ाने का कदम नहीं, बल्कि आगामी चुनावों को देखते हुए जातीय संतुलन, युवा नेतृत्व और राजनीतिक विरासत को साधने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।












