-शिक्षा पदाधिकारी ने ‘पत्नी’ के नाम पर एक दिन में खरीदी 2 करोड़ की संपत्ति,राजधानी में खपाया पैसा
सम्वाददाता। पटना।
बिहार में धनकुबेर अफसरों की कमी नहीं. वैध-अवैध तरीके से कमाए पैसे को वैसे अफसर जमीन-फ्लैट में लगाते हैं. कई ऐसे विभाग हैं जहां भ्रष्टाचार सिर चढ़कर बोल रहा. हाल ही में सिवान के जिला शिक्षा पदाधिकारी के ठिकानों पर जब निगरानी ने छापेमारी की तो पता चला कि उसने तो पटना की बजाय नोएडा में अकूत संपत्ति अर्जित की है. वैसे सिर्फ सिवान के तत्कालीन डीईओ ही धनकुबेर नहीं बल्कि अन्य जिलों के शिक्षा पदाधिकारी की भी वही हालत है. एक-एक दिन में करोड़ों की संपत्ति खरीद रहे. आज एक जिले के शिक्षा अधिकारी के बारे में आपको बताते हैं. साहब इसी साल राजधानी में लगभग दो करोड़ की जमीन की खरीद की है. खुद तो खरीदे ही, अपने खास और विश्वास पात्र सहायक की भी मकान बनवाने के लिए प्लॉट की खरीद कराई है. अब एक साथ इतना पैसा साहब ने कहां से लाया, यह तो वही बता सकते हैं या फिर एजेंसियां ही पूछ सकती हैं.
शिक्षा पदाधिकारी ने मार्च 2023 में एक दिन में राजधानी में लगभग दो करोड़ का प्लॉट खरीदा है. यह खरीद पत्नी ## कुमारी के नाम पर की है. जो कागजात मिले हैं उसके अनुसार शिक्षा पदाधिकारी ने बेली रोड़ से सटे दानापुर नगरपालिका इलाके के एक मोहल्ले में आवासीय ब्रांच रोड में लगभग पांच डिसमिल जमीन की खरीद की है. जमीन की रजिस्ट्री दानापुर अवर निबंधन कार्यालय में मार्च 2023 में कराई गई. सरकारी रेट पचास लाख से नीचे बताई गई है. हालांकि जिस इलाके में कुमार साहब ने जमीन की खरीद की है, वो काफी महंगा इलाका है. उस इलाके में प्रति कट्टा करोड़ रू का बाजार रेट है. बताया जाता है कि जिस प्लॉट में साहब ने बेशकीमती जमीन की खरीद की है, उसी में उनके एक खास सहायक ने भी जमीन की खरीद की है. बताया जाता है कि ऐतिहासिक जिले में साहब-सहायक की जोड़ी ने बहती गंगा में जमकर हाथ धोया है.

अब आपको बताते हैं कि शिक्षा विभाग के वो कौन पदाधिकारी हैं. बताया जाता है कि शिक्षा पदाधिकारी लगभग 2.5 सालों से एक जिले में पदस्थापित हैं. इस दौरान उन पर कई तरह के आरोप भी लगे. दफ्तर में लिपिक बंधुओं से विवाद भी हुआ. विवाद की गुंज मुख्यालय तक पहुंची थी. कमिश्नरी स्तर के विभागीय अफसर से जांच भी कराई गई और रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई. लेकिन शिक्षा पदाधिकारी पर कोई एक्शन नहीं हुआ. यह अलग बात है कि अफसर से लड़ाई में एक पक्ष को विभाग ने निलंबित कर दिया था. शिक्षा पदाधिकारी के बारे में बताया जाता है कि वो सूबे के एक ऐतिहासिक जिले में जिला स्तरीय पद पर पदस्थापित हैं. वैसे, शिक्षा पदाधिकारी के पास एक बार में इतना पैसा कहां से आया, इसका जवाब तो वहीं दे सकते हैं. लेकिन शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी की गोपनीय बात बाहर आ गई है. राजधानी में एक दिन में बाजार रेट से करोड़ों की संपत्ति खरीद का पेपर सामने आ गया है.












