-लगुराव चौर से बरामद सरकारी दवाइयां जांच के लिए महुआ अस्पताल भेजी गईं, लाखों की दवा फेंके जाने से उठे सवाल
राजापाकर-संजय श्रीवास्तव। राजापाकर प्रखंड क्षेत्र के लगुराव बिलंदपुर पंचायत स्थित लगुराव चौर में गड्ढे में फेंकी गई भारी मात्रा में सरकारी दवाइयों और सर्जिकल सामान को गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की गाड़ियों में लोड कर अनुमंडल अस्पताल महुआ भेज दिया गया। वहां दवाओं की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि मंगलवार को ग्रामीणों ने चौर के गड्ढेनुमा पानी में बड़ी संख्या में सरकारी अस्पतालों में उपयोग होने वाली दवाइयां, इंजेक्शन और चिकित्सीय सामग्री देखी थी। इसके बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को दी थी। सूचना मिलते ही राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम और जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और मामले की जांच शुरू की गई थी।
गुरुवार को अनुमंडल पदाधिकारी महुआ, बीडीओ सौरव बरनवाल, सीओ मणि वर्मा, राजापाकर बीडीओ सूर्य प्रताप सिंह और सीओ गौरव कुमार की मौजूदगी में स्वास्थ्य विभाग की तीन गाड़ियों से दवाओं और सर्जिकल सामान को प्लास्टिक के बोरे में भरकर महुआ अनुमंडल अस्पताल भेजा गया। स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि पंकज कुमार भी मौके पर मौजूद रहे।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दवाइयों और उपकरणों का निरीक्षण करते हुए बैच नंबर और एक्सपायरी तिथि की जांच की। अधिकांश दवाओं पर जनवरी 2027 तक की एक्सपायरी अंकित पाई गई। बरामद दवाओं में मेटफॉर्मिन, लैक्टोलोस, पीडियाड्रिप, सिल्वर सल्फाडायजिन, बी-कॉम्प्लेक्स सिरप, परमैथ्रिन क्रीम, माइकोनाजोल क्रीम और ओआरएस के पैकेट शामिल हैं। वहीं सर्जिकल सामग्री में बड़ी संख्या में नई सिरिंज, यूरिन बैग और सर्जिकल ग्लव्स मिले हैं।
चौर में जमा गंदे पानी से दवाओं और सर्जिकल सामान को स्टोरकीपर दीपक कुमार, अन्य स्वास्थ्य कर्मियों और ग्रामीणों की मदद से पॉलिथीन बैग में भरकर गाड़ियों में लोड किया गया। मंगलवार को ग्रामीण दवाओं को सिविल सर्जन के आने के बाद ही हटाने की मांग कर रहे थे, लेकिन गुरुवार को अधिकारियों द्वारा समझाने के बाद दवाओं को वहां से हटाया गया।
फिलहाल कोई भी स्वास्थ्य कर्मी या अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं है कि इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी दवाइयां कहां से लाई गईं और किसने इन्हें खुले में फेंका। प्रशासन इसे गंभीर मामला मानते हुए जांच की बात कह रहा है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं और दवाओं को फेंकने की वजह क्या थी।
इधर, लाखों रुपये मूल्य की सरकारी दवाओं और सर्जिकल सामान को गंदे पानी में फेंके जाने की घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में अक्सर मरीजों को सर्जिकल सामान बाहर से खरीदने के लिए कहा जाता है, जबकि दूसरी ओर इतनी बड़ी मात्रा में उपयोगी सामग्री खुले में फेंकी मिली है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।












