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रामवृक्ष बेनीपुरी की जयंती पर व्याख्यानमाला,बज्जिका भाषा के गौरव पर गूंजे विचार

-रामवृक्ष बेनीपुरी की जयंती पर व्याख्यानमाला,बज्जिका भाषा के गौरव पर गूंजे विचार

मुजफ्फरपुर। जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में साहित्य जगत के सूर्य रामवृक्ष बेनीपुरी की 125वीं जयंती पर एक व्याख्यानमाला का आयोजन थियोसोफिकल लाज, नया टोला में किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता चित्तरंजन सिन्हा कनक ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री उदय नारायण सिंह ने कहा कि बेनीपुरी जी का साहित्य उनकी माटी की सुगंध और जनसंवेदना का परिचायक है। “माटी की मूरतें” इसका ज्वलंत प्रमाण है।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शारदाचरण ने उन्हें जनसंवेदना का साहित्यकार बताते हुए उनके योगदान की प्रशंसा की। चित्तरंजन सिन्हा कनक ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि बेनीपुरी जी का दिल मुजफ्फरपुर में बसता था और यहां उनका आत्मीय संबंध था।

अन्य वक्ताओं में डॉ. विनोद कुमार सिन्हा, मधु मंगल ठाकुर, प्रमोद नारायण मिश्र, प्रेम कुमार वर्मा, और डॉ. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी ने इस बात पर बल दिया कि बेनीपुरी जी का साहित्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।

कार्यक्रम का संचालन प्रचार मंत्री गणेश प्रसाद सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन मीडिया प्रभारी रमेश प्रसाद श्रीवास्तव ने किया।

कार्यक्रम के समापन पर यह निर्णय लिया गया कि साहित्यकारों को राग-द्वेष से ऊपर उठकर सृजन करना चाहिए। इस व्याख्यानमाला ने बेनीपुरी जी के साहित्यिक योगदान को नए सिरे से उजागर किया।

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