-मौनी अमावस्या पर पितृ तर्पण हेतु लोगों ने परंपरागत रूप से उखाड़ा कुश
जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर।
भाद्र मास की मौनी अमावस्या के अवसर पर शनिवार को जनकपुरधाम सहित आसपास क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों ने पितृ तर्पण के लिए परंपरागत रूप से कुश उखाड़ा। सुबह से ही श्रद्धालु चौर-खेतों में जाकर कुश उखाड़ कर घर लौटे और पितृ तर्पण की तैयारी में जुट गए।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पुत्र अथवा जिन परिवारों में माता-पिता के एकमात्र संतान हैं, वे कुश उखाड़कर पितृ तर्पण का विशेष अनुष्ठान करते हैं। यह तर्पण प्रायः पवित्र सरोवरों और नदियों के तट पर किया जाता है।

जनकपुरधाम में गंगासागर सरोवर, दूधमती नदी सहित अन्य पवित्र जलस्थलों पर शनिवार को भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और विधि-विधान से अपने पितरों को तर्पण अर्पित किया।
विशेष रूप से गंगासागर में हर वर्ष नेपाल ही नहीं बल्कि भारत के विभिन्न हिस्सों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह स्थल पितृ तर्पण के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।
इसी संदर्भ में गया (बिहार) का भी विशेष महत्व है, जहां पितृ पक्ष में दुनिया भर से हिंदू समुदाय के लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गया में पिंडदान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त होती है।














