मुजफ्फरपुर: हिंदी दिवस पर व्याख्यानमाला और काव्य गोष्ठी आयोजित
संवाददाता।मुजफ्फरपुर।
जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन मुजफ्फरपुर के बैनर तले थियोसोफिकल लाज नया टोला में “आज की हिंदी की दशा और दिशा”पर चित्तरंजन सिन्हा कनक की अध्यक्षता में एक व्याख्यानमाला आयोजित की गई। विषय प्रवेश करते हुए जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री उदय नारायण सिंह ने कहा कि हिंदी आज भी भारत में महारानी बनकर नहीं बल्कि नौकरानी बनकर जी रही है। हिंदी को जो मान -सम्मान मिलना चाहिए वह इसे आजतक नहीं मिल पाया है।इसका मुख्य कारण सरकार की उदासीनता और कुकुरमुत्ते की तरह उग आए इंग्लिश मीडियम स्कूल हैं।जिस दिन इंग्लिश मीडियम स्कूल का चलन बंद हो जाएगा उस दिन हिंदी राष्ट्रभाषा बन जाएगी।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में चित्तरंजन सिन्हा कनक ने कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का अबतक दर्ज़ा नहीं दिया जाना अतिशय निंदनीय और अशोभनीय है। सिर्फ सरकारी उदासीनता इसके प्रगति पथ पर बाधक है।

कार्याध्यक्ष डॉ शारदाचरण ने कहा कि हिंदी सभी को जोड़ने वाली भाषा है तोड़ने वाली नहीं। यह सरकारी षड्यंत्र का शिकार है जिस कारण आजतक हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिला। उपाध्यक्ष प्रेम कुमार वर्मा ने कहा कि हिंदी मेरी आन -बान और शान की भाषा है।साहित्य मंत्री डॉ लोकनाथ मिश्र ने कहा कि हिंदी प्रेम और भाईचारे की भाषा है। देवेन्द्र कुमार ने बोलते हुए कहा कि सरकारी उदासीनता के कारण हिन्दी आजतक राजभाषा नहीं बनी जब कि इसे बहुत पहले राष्ट्रभाषा बन जाना चाहिए था। पत्रकार प्रमोद नारायण मिश्र ने कहा कि हिंदी आम जन की भाषा है इसलिए इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया ही जाना चाहिए। हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया जाना सरकार की अकर्मण्यता है। इस सुअवसर पर सर्वश्री गणेश प्रसाद सिंह, डॉ हरि किशोर प्रसाद सिंह, डॉ बी के मल्लिक, डॉ उषा किरण, मधु मंगल ठाकुर, उत्तम कुमार ने अमूल्य विचार व्यक्त किए।इस सुअवसर पर डॉ उषा किरण श्रीवास्तव की बज्जिका पुस्तक -“बज्जिका के सोलह संस्कार गीत ” का भी लोकार्पण किया गया। सभी वक्ताओं ने इस पुस्तक पर भी अपने विचार रखे।दूसरे सत्र में भव्य कवि गोष्ठी आयोजित हुई जिसमें कवियों ने एक से बढ़कर एक कविता सुनाई और तालियां की गड़गड़ाहट से थियोसोफिकल लाज का वातावरण रसमय और मनमोहक बना रहा। रमेश प्रसाद श्रीवास्तव के धन्यवाद ज्ञापन के बाद गोष्ठी समाप्त की गई।












