-महावाणी स्मरण एवं काव्य गोष्ठी में गूंज उठीं साहित्यिक भावनाएं, महाकवि जानकी वल्लभ शास्त्री को दी श्रद्धांजलि
-वरिष्ठ साहित्यकारों और कवियों ने किया भावपूर्ण काव्यपाठ, रविन्द्रनाथ टैगोर को भी दी गई श्रद्धांजलि
मुजफ्फरपुर।
महाकवि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के निवास निराला निकेतन, प्रतिमास्थल पर बुधवार को “महावाणी स्मरण सह काव्य गोष्ठी” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत शास्त्री जी के अनछुए प्रसंगों को साझा करते हुए वरिष्ठ कवि अंजनी कुमार पाठक द्वारा की गई, जिससे साहित्यप्रेमियों की भावनाएं गहराई से जुड़ गईं।
इस अवसर पर गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार सत्येंद्र कुमार सत्येन ने की।
कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
अरुण कुमार तुलसी ने “शेष जीवन की व्यथा अब कौन हरे?” सुना कर खूब सराहना पाई।
अंजनी कुमार पाठक ने “जय भोलेनाथ जय शिवशंकर” गीत से आध्यात्मिकता का संचार किया।
साहित्यकार डा. हरिकिशोर सिंह की कविता “वसंत आ गया, खिली फूलों की कली” ने प्रकृति का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया।
भोजपुरी गीतकार सत्येंद्र कुमार सत्येन ने “बाबा पूरा करिहें मनवा के आस” सुनाकर समां बांधा।

पत्रकार प्रमोद नारायण मिश्र ने “यशोदा के प्यारे मोहन फिर एक बार आओ” से भक्ति भाव जगाया।
कथा लेखिका डा. उषा किरण श्रीवास्तव ने “हे भोले भंडारी तेरी लीला अगम अपार है” से श्रोताओं को भक्ति रस में डुबोया।
कवयित्री डा. संगीता सागर की रचना “बादलों की गांव में पानी प्यासा लौट आया” ने जीवन की विडंबना को उकेरा।
दीनबंधु आज़ाद ने “जिंदगी तो अपने दम पर जी जाती है” से आत्मबल का संदेश दिया।
वरिष्ठ शायर रामवृक्ष चकपुरी ने “शांति का आईना दिखा, खुद महासमर पर कवित्त करता” से सामाजिक संदेश दिया।
अधिवक्ता अशोक भारती ने “यूँ अकेले तेरा चलना तो क्या चलना?” से संवेदनाओं को शब्द दिए।
कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ समाजसेवी मोहन प्रसाद सिन्हा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
यह गोष्ठी न केवल साहित्यिक स्मृतियों को ताजा करने वाली रही, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत भी बनी।











