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पूसा कृषि मौसम बुलेटिन: 22 से 26 अगस्त तक हल्की से मध्यम बारिश के आसार, कई जिलों में भारी बारिश की संभावना

-पूसा कृषि मौसम बुलेटिन: 22 से 26 अगस्त तक हल्की से मध्यम बारिश के आसार, कई जिलों में भारी बारिश की संभावना

समस्तीपुर। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से 21 अगस्त 2026 के लिए जारी कृषि मौसम बुलेटिन में अगले पांच दिनों के मौसम को लेकर पूर्वानुमान जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार 22 से 26 अगस्त के बीच बिहार के कई हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। वहीं कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 25 और 26 अगस्त के आसपास बेगूसराय, समस्तीपुर, गोपालगंज, सीवान, वैशाली, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान कुल 45 से 65 मिलीमीटर तक बारिश होने का अनुमान है।
इस अवधि में अधिकतम तापमान 32 से 36 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 26 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता करीब 85 प्रतिशत और दोपहर में 50 से 55 प्रतिशत के बीच रह सकती है। पूर्वानुमान अवधि में हवाएं मुख्य रूप से पूर्वी दिशा से 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने की संभावना है।
पिछले तीन दिनों के मौसम का आकलन करते हुए पूसा मौसम वेधशाला ने बताया कि इस दौरान औसत अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह सापेक्ष आर्द्रता 91 प्रतिशत और दोपहर में 83 प्रतिशत रही। औसत हवा की गति 10.7 किलोमीटर प्रति घंटा तथा दैनिक वाष्पन 3.3 मिलीमीटर दर्ज किया गया। इस अवधि में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा।
मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों को मक्के की फसल में तना छेदक और फॉल आर्मीवर्म की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के साथ तना छेदक और पत्ती लपेटक कीटों पर नजर रखने को कहा गया है। कीटों का प्रकोप दिखाई देने पर कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार उचित कीटनाशक का प्रयोग करने की बात कही गई है।


उत्तर बिहार में परवल की बुआई के लिए राजेंद्र परवल-1, राजेंद्र परवल-2, राजेंद्र परवल-3, स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक और स्वर्ण सुरभि किस्मों को उपयुक्त बताया गया है। किसानों को खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद का प्रयोग करने तथा संतुलित मात्रा में नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश देने की सलाह दी गई है।
बैंगन की फसल में तना और फल छेदक कीट की नियमित निगरानी करने तथा संक्रमित टहनियों और फलों को तोड़कर नष्ट करने की सलाह दी गई है। लीची बागानों में स्टिंक बग के प्रबंधन के लिए तने के चारों ओर चिपचिपे बैंड लगाने और जमीन पर गिरे कीटों को एकत्र कर नष्ट करने को कहा गया है।
मौसम को फलदार पौधों के रोपण के लिए भी अनुकूल बताया गया है। किसान आम, लीची, कटहल, अमरूद, जामुन, सीताफल और नींबू जैसे पौधों का रोपण कर सकते हैं। पौधों के लिए अधिकृत नर्सरियों से स्वस्थ एवं रोगमुक्त पौध सामग्री लेने तथा रोपण से पहले गड्ढों में अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद मिलाने की सलाह दी गई है।
पशुपालकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वर्तमान मौसम में गाय और भैंस में लंपी स्किन डिजीज के संक्रमण की संभावना को देखते हुए पशुओं की नियमित निगरानी, साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखने को कहा गया है। पशुओं में तेज बुखार, शरीर पर गांठ, घाव, लंगड़ापन, भोजन-पानी का सेवन कम होना या दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
कृषि मौसम विशेषज्ञों ने किसानों से मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने और फसलों की नियमित निगरानी करने की अपील की है।