-पढ़ाई के साथ कमाई का मौका भी नहीं खींच पा रहा छात्रों का ध्यान
-AEDP कोर्स में 30 से भी कम अंतिम आवेदन
मुजफ्फरपुर। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ कमाई का अवसर देने के उद्देश्य से शुरू किया गया अप्रेंटिसशिप एंबेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) छात्रों को आकर्षित नहीं कर पा रहा है। चार वर्षीय इस नए डिग्री कोर्स में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के कई दिनों बाद भी अपेक्षित संख्या में आवेदन नहीं मिले हैं।
विस्तारित समय-सीमा के अनुसार मंगलवार आवेदन की अंतिम तिथि है। इसके बावजूद अब तक केवल 80 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से महज 26 विद्यार्थियों ने ही शुल्क जमा कर अंतिम रूप से आवेदन पूरा किया है। वहीं 54 से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन तो किया, लेकिन शुल्क जमा नहीं किया।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि नामांकन प्रक्रिया में देरी, कोर्स के प्रति जागरूकता की कमी तथा अपेक्षाकृत अधिक शुल्क के कारण विद्यार्थियों की रुचि कम देखने को मिल रही है। चार वर्षीय इस कोर्स के आठों सेमेस्टर में प्रति सेमेस्टर 12 हजार रुपये शुल्क देना होगा, यानी कुल शुल्क करीब 96 हजार रुपये है।

हालांकि इस कोर्स की विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ उद्योगों में प्रशिक्षण (अप्रेंटिसशिप) दिया जाएगा और प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रति माह लगभग 8 से 9 हजार रुपये तक वजीफा सीधे उनके बैंक खाते में भेजा जाएगा।
नए शैक्षणिक सत्र से बिहार के तीन विश्वविद्यालयों में इस योजना की शुरुआत की जा रही है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) से संबद्ध एलएनटी कॉलेज, मोतिहारी, आरएन कॉलेज, हाजीपुर और आरएसएस साइंस कॉलेज, सीतामढ़ी में विभिन्न बीकॉम एवं बीए पाठ्यक्रमों के तहत कुल 60-60 सीटों पर नामांकन होना है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल स्नातक तैयार करना, छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाना तथा उच्च शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इसके बावजूद शुरुआती चरण में छात्रों की सीमित रुचि विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।














