-नीतीश कुमार क्यों नहीं बन पाए एकनाथ शिंदे?
-महाराष्ट्र में बीजेपी की अगली रणनीति जान लीजिए
दीपक कुमार तिवारी। पटना/महाराष्ट्र/नई दिल्ली।
महाराष्ट्र में सबकुछ ठीक है, मगर सीएम कौन होगा? इस सवाल का जवाब जानता तो हर कोई है, फिर भी ‘अगर-मगर’ के बीच में घिरा हुआ है। वैसे, महाराष्ट्र में सीएम की कुर्सी से बीजेपी मात्र 13 विधायक ही दूर है। बिहार में तो फिर भी फासला थोड़ा ज्यादा है तो बीजेपी को उतना अफसोस नहीं होता होगा। मगर, महाराष्ट्र में तो सिर्फ 13 के लिए ही एकनाथ शिंदे आंखें तरेर रहे हैं और बीजेपी अपना सीएम उम्मीदवार का नाम एनाउंस करने से घबरा रही है। रिजल्ट के एक सप्ताह बाद भी 4-5 दिन आगे का अनुमान लगाया जा रहा है। बीजेपी के मैनेजर अगर इस ‘कुर्सी’ वाले गैप को भर पाए तो फिर एकनाथ शिंदे के पास क्या बचेगा? इस मामले में नीतीश कुमार होशियार हैं, वो गैप ही इतना ज्यादा रखते हैं कि उसे भरना ना तो बीजेपी के लिए और ना ही लालू यादव के लिए आसान है। लिहाजा, बीच में फंस कर दोनों तरफ से (कभी बीजेपी तो कभी लालू) सत्ता का लुत्फ उठाते रहते हैं। इस मामले में एकनाथ शिंदे नीतीश कुमार से काफी पीछे रह गए। वरना, देश की सियासत में नीतीश कुमार का तमगा एकनाथ शिंदे को भी मिल सकता था।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में बीजेपी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के गठबंधन ‘महायुति’ ने 288 में से 235 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी। सदन में बहुमत के लिए 145 विधायकों की जरूरत होती है। बीजेपी 132 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। मगर, बहुमत से 13 विधायक दूर रह गई।
एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 57 और एनसीपी को 41 सीटें मिली। 23 नवंबर को चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद शिवसेना ने एकनाथ शिंदे और एनसीपी ने अजित पवार को अपना नेता चुना था। बीजेपी के विधायक दल का नेता कौन होगा, उस पर पेच फंसा हुआ है। एकनाथ शिंदे ने ऐन मौके पर ‘चौका’ मार दिया, जिससे मामला उलझ गया। मगर, लगता नहीं कि एकनाथ शिंदे मामले को ज्यादा उलझा पाएंगे।

बिहार में चार सीटों पर उपचुनाव के बाद सदन में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी हो गई। विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के 80 विधायक हो गए। मगर, अपने बुत्ते बहुमत से 41 विधायक दूर है। दो सीटें हार जाने के बाद राजद के पास 77 विधायक बचे। जदयू के पास पहले से 45 विधायक थे, जो अब बेलागंज सीट जीतने पर 46 विधायक हुए। भाकपा माले के 12 विधायक थे लेकिन तरारी सीट हार जाने के बाद भाकपा माले के 11 विधायक हो गए। जीतन राम मांझी की चार सीट बरकरार है।
243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में महागठबंधन के पास अभी 112 विधायक हैं। वहीं, सत्ता पक्ष एनडीए के पास 131 विधायक हैं। वर्तमान में विधानसभा के 243 सीटों में से सत्ता पक्ष के भाजपा के 80, जदयू के 46, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के 4 और निर्दलीय एक सुमित सिंह मिलाकर 131 विधायकों का कुनबा है। विपक्षी महागठबंधन में राजद के 77, कांग्रेस के 19, भाकपा माले के 11, भाकपा के 2, माकपा के 2 और एआईएमआईएम के एक विधायक मिलाकर कुल 112 विधायक विपक्ष में हैं।












