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नाच मंडली चलाने वाले 115 वर्षीय रामाज्ञा राम नहीं रहे

#अलविदा_रामज्ञा

भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर के नाच मंडली के सदस्य रहे और बाद के दिनों में खुद की नाच मंडली चलाने वाले 115 वर्षीय रामाज्ञा राम नहीं रहे। भोजपुरी लोक संस्कृति के भिखारी ठाकुर परंपरा के कैसे कलाकार जो 115 वर्ष की आयु में भी मंच के टच कलाकार थे।भोजपुरी की लोकायिका कल्पना पटवारी ने रामाज्ञा राम को लेकर कई सारे प्रोजेक्ट किए तस्वीर उसी प्रोजेक्ट की है जिसमें मैं भी शामिल था। रामज्ञा राम जैसे कलाकारों को अगर जीवित अवस्था में पद्मश्री जैसा पुरस्कार मिलता तो जरूर 18 करोड़ भोजपुरिया लोगों को गर्व होता। रामचंद्र मांझी को जब पद्मश्री मिला तो जरूर बिहारी ठाकुर की आत्मा को भी सुकून मिला होगा। रामज्ञा राम अपने आप में रिसर्च के विषय थे ।बहुत कुछ उनके अंदर था जो अभी निकालना बाकी था। बिहार के मौजूदा कला संस्कृति मंत्री जितेंद्र कुमार राय को लेकर काफी उत्साहित थे बहुत कुछ करना चाहते थे उसे दिशा में पहल भी हुई थी। रामचंद्र माझी के लिए भी अगर किसी नेता ने कुछ किया तो वह जितेंद्र राय ने किया हालांकि रामचंद्र माझी जितेंद्र राय के विधानसभा मरहौरा के ही रहने वाले थे। रामग्या राम को गुमनामी के अंधेरे से कल्पना पटवारी ने निकाला आरा के गांव से उठाकर सीधे मुंबई ले गई उनकी गीतों को संग्रहित किया रिकॉर्ड करवाया मंच पर लेकर आई। आज से 7 वर्ष पूर्व कल्पना पटवारी में ही उनसे मुझे मिलवाया था। कल्पना ने बताया कि पहली बार बखोरापुर काली महोत्सव में इस वृद्ध कलाकार को गाते हुए उन्होंने सुना था। गीत था गंगा जी हो इस गीत ने कल्पना को इतना प्रभावित किया कि वह इस कलाकार की मुरीद हो गई मुंबई लेकर चली गई। जीतना आर्थिक मदद कर सकती थी उतना आर्थिक मदद भी किया।

बाद में पटना में भाजपा कला संस्कृति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष वरुण कुमार सिंह ने इस कलाकार के सम्मान में बड़ा आयोजन किया। समय-समय पर आर्थिक मदद भी की। पर अपनी विरासत को सजाने वाले ऐसे कलाकारों का ऐसे गुमनाम ही चले जाना दर्द तो देता है सोचिएगा जरूर अब यह लोग लौटकर नहीं आने वाले हम और आप अब उनकी कहानियों को पढ़ेंगे तो लगेगा कि शायद इनके काल में हम होते तो उनके लिए जरूर कुछ कर पाते।

#अनूप